भारत-फ्रांस रक्षा सौदा: 2032 तक भारतीय बेड़े में होंगे 176 राफेल जेट

भारत और फ्रांस के बीच ₹3.25 लाख करोड़ के रक्षा सौदे के तहत 114 नए राफेल जेट खरीदे जाएंगे। इस डील के बाद 2032 तक भारत के पास कुल 176 राफेल विमान होंगे, जो फ्रांस के वर्तमान बेड़े के लगभग बराबर है। इनमें से 80% विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 25 लाख करोड़ के एक विशाल रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इस सौदे के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की जाएगी। इस रणनीतिक विस्तार के बाद, वर्ष 2032 तक भारत के पास कुल 176 राफेल विमानों का बेड़ा तैयार हो जाएगा, जो संख्यात्मक रूप से फ्रांस की वर्तमान वायु सेना की क्षमता को कड़ी टक्कर देगा।

रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी और सौदे का विवरण

60 लाख करोड़ के हथियारों की खरीद को प्रशासनिक मंजूरी दी गई। 25 लाख करोड़ विशेष रूप से राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए आवंटित किए गए हैं। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है। इस सौदे की शर्तों के अनुसार, शुरुआती 18 राफेल विमान फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा सीधे 'फ्लाई-अवे' स्थिति में आपूर्ति किए जाएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

मेक इन इंडिया के तहत 80% स्थानीय विनिर्माण

इस मेगा डील की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका स्वदेशी विनिर्माण घटक है। रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कुल 114 विमानों में से लगभग 80% यानी 96 जेट भारत में निर्मित किए जाएंगे। यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है और डसॉल्ट एविएशन भारतीय भागीदारों के साथ मिलकर इन विमानों के उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीक और बुनियादी ढांचा विकसित करेगी। इससे न केवल भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि भविष्य में विमानों के रखरखाव और मरम्मत के लिए भी विदेशी निर्भरता कम होगी।

भारतीय वायुसेना और नौसेना की संयुक्त शक्ति

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल विमानों का बेड़ा है, जिन्हें हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हासिमारा स्थित स्क्वाड्रन में तैनात किया गया है। इन विमानों की खरीद 2016 में की गई थी। 4 बिलियन) में किया था। नौसेना को पहला मरीन राफेल 2028 में मिलने की उम्मीद है। जब 114 नए विमानों की डिलीवरी पूरी हो जाएगी, तब भारत दुनिया का ऐसा पहला देश बन जाएगा जो फ्रांस के बाहर राफेल के दोनों वेरिएंट्स (वायुसेना और नौसेना) का संचालन करेगा।

फ्रांस और भारत के राफेल बेड़े का तुलनात्मक विवरण

रक्षा विशेषज्ञों और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस के पास वर्तमान में कुल 178 राफेल विमान हैं, जिनमें 137 वायुसेना और 41 नौसेना के पास हैं। फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय की योजना के अनुसार, 2030 तक उनकी संख्या 178 ही बनी रहेगी और 2035 तक इसे बढ़ाकर 225 करने का लक्ष्य है। दूसरी ओर, भारत 2032 तक 176 राफेल विमानों का परिचालन शुरू कर देगा। इसका अर्थ है कि 2032 के समय में भारत और फ्रांस की राफेल शक्ति लगभग समान स्तर पर होगी। फ्रांस ने भविष्य में अपने बेड़े को 286 तक ले जाने की योजना बनाई है, लेकिन इसमें अन्य देशों को निर्यात किए जाने वाले विमान भी शामिल हो सकते हैं।

डसॉल्ट एविएशन का सबसे बड़ा वैश्विक ग्राहक बना भारत

इस नए सौदे के साथ भारत आधिकारिक तौर पर फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन गया है। हालांकि डसॉल्ट ने मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया, ग्रीस और क्रोएशिया जैसे देशों से भी ऑर्डर प्राप्त किए हैं, लेकिन भारत का 176 विमानों का कुल ऑर्डर किसी भी अन्य देश की तुलना में काफी अधिक है। तुलनात्मक रूप से, यूएई ने 2021 में 80 विमानों का ऑर्डर दिया था, जबकि इंडोनेशिया ने 2022 में 42 विमानों के लिए समझौता किया था। भारत द्वारा इतनी बड़ी संख्या में विमानों का अधिग्रहण दक्षिण एशिया में उसकी रक्षात्मक और रणनीतिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

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