फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है, जबकि भारत की खुले तौर पर प्रशंसा की है और मैक्रों ने भारत को Multilateralism, इनोवेशन और रणनीतिक साझेदारी के लिए एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में रेखांकित किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक राजनीति में नई धुरी बन रही है और कई यूरोपीय नेता ट्रंप की नीतियों से असहज महसूस कर रहे हैं। मैक्रों का भारत की ओर यह झुकाव वैश्विक मंच पर। भारत की बढ़ती भूमिका और विश्वसनीयता का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
वैश्विक राजनीति में बदलती धुरी
डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक सहयोग और बहुपक्षीय समझौतों पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस नीति के तहत, अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की 31 और अन्य 35 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अलग होने का आदेश दिया है, जिससे दुनिया भर के देशों में हलचल मच गई है। इस कदम ने कई देशों को आपसी सहयोग के लिए नए साझेदारों की तलाश करने पर मजबूर कर दिया है और ऐसे में, फ्रांस जैसे प्रमुख यूरोपीय देश का भारत की ओर झुकाव, वैश्विक शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है, जिस पर बड़े देश भरोसा कर सकते हैं। मैक्रों का बयान इस बात पर जोर देता है कि भारत एक स्थिर और विश्वसनीय भागीदार है जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बहुपक्षवाद और नवाचार के लिए भारत की प्रशंसा
इमैनुएल मैक्रों ने विशेष रूप से Multilateralism (बहुपक्षवाद) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की है। उन्होंने पिछले साल आयोजित एक AI समिट का उल्लेख किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी उपस्थित थे और पूरी दुनिया ने इसे देखा था और मैक्रों ने कहा कि वह अगले महीने भारत का दौरा करेंगे ताकि इन प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि फ्रांस ने भारत के साथ एक अंतरराष्ट्रीय समझौता करने में सफलता हासिल की है, जो बहुपक्षवाद का मूल आधार है। यह समझौता न केवल नवाचार में विश्वास रखता है, बल्कि निष्पक्ष नियमों को भी प्राथमिकता देता है। यह दर्शाता है कि भारत एक ऐसा देश है जो वैश्विक सहयोग और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने। के लिए तैयार है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि ये प्रगति सभी के लिए न्यायसंगत हो।
रणनीतिक साझेदारी और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर सहयोग
मैक्रों ने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी मंशा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फरवरी में उनके भारत दौरे के दौरान, फ्रांस और भारत दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earth Minerals) पर सहयोग जारी रखेंगे। दुर्लभ पृथ्वी खनिज आधुनिक तकनीक और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इन पर सहयोग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिरता लाने और दोनों देशों के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह साझेदारी केवल आर्थिक या तकनीकी नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक महत्व भी रखती है, क्योंकि यह दोनों देशों को एक-दूसरे की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। यह सहयोग भारत और फ्रांस के बीच गहरे विश्वास और साझा हितों को दर्शाता है।
नैरोबी समिट का निमंत्रण और उद्यमिता पर जोर
फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम, नैरोबी समिट का भी उल्लेख किया, जिसका आयोजन फ्रांस कर रहा है। इस समिट का उद्देश्य उद्यमिता (Entrepreneurship) पर काम करने के अपने क्रांतिकारी दृष्टिकोण को प्रदर्शित करना है। मैक्रों ने इस समिट में प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर को भी आमंत्रित किया है। यह निमंत्रण भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और नवाचार क्षमता को मान्यता देता है। उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करना वैश्विक आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है, और इस मंच पर भारत की भागीदारी वैश्विक आर्थिक नीतियों को आकार देने में उसकी भूमिका को मजबूत करेगी। यह दर्शाता है कि फ्रांस भारत को केवल एक रणनीतिक साझेदार के रूप में। ही नहीं, बल्कि एक आर्थिक और नवाचार शक्ति के रूप में भी देखता है।
ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से नाराजगी का कारण
मैक्रों की नाराजगी डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले के बाद आई है जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र। की 31 और अन्य 35 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका के अलग होने का आदेश दिया है। इस 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने वैश्विक सहयोग और बहुपक्षीय कूटनीति की नींव को हिला दिया है और ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को अपने हितों को सबसे ऊपर रखना चाहिए, भले ही इसका मतलब अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संगठनों से पीछे हटना हो। हालांकि, मैक्रों जैसे नेता मानते हैं कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याओं को कोई भी देश अकेले हल नहीं कर सकता। इसलिए, ट्रंप के फैसले ने दुनिया के तमाम देशों में हलचल पैदा कर दी है और वे आपसी सहयोग के लिए नए पार्टनर्स की तलाश करने में जुट गए हैं और फ्रांस के राष्ट्रपति का भारत की ओर झुकाव इसी वैश्विक पुनर्संरेखण का एक स्पष्ट उदाहरण है।
भारत-फ्रांस संबंधों का भविष्य
इमैनुएल मैक्रों का भारत की तारीफ करना और उनके आगामी दौरे की घोषणा करना भारत-फ्रांस संबंधों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है। यह दर्शाता है कि दोनों देश न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के। लिए प्रतिबद्ध हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक साथ काम करने के इच्छुक हैं। बहुपक्षवाद, नवाचार, रणनीतिक साझेदारी और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर सहयोग जैसे क्षेत्रों में यह साझेदारी वैश्विक स्थिरता और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। जैसे-जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य विकसित हो रहा है, भारत और फ्रांस जैसे समान विचारधारा वाले देशों के बीच मजबूत संबंध एक अधिक स्थिर और सहकारी विश्व व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह साझेदारी भविष्य में कई अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में भी काम। कर सकती है जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं। यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुंच और वैश्विक प्रभाव का भी प्रमाण है।