ट्रंप का नया ग्लोबल टैरिफ: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व के टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10% का नया ग्लोबल टैरिफ घोषित किया है। 24 फरवरी 2026 से लागू होने वाले इस फैसले से भारत पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटकर 10% हो जाएगा, जिससे व्यापार समीकरण बदलेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित वस्तुओं पर 10% का नया ग्लोबल टैरिफ घोषित किए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में बड़े बदलाव की संभावना है। यह घोषणा अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पिछले टैरिफ आदेशों को पूरी तरह नकारने के कुछ ही घंटों बाद की गई है। नए आदेश के अनुसार, 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयात होने वाली वस्तुओं पर 10% का अस्थायी 'इंपोर्ट सरचार्ज' लागू होगा। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, इस बदलाव के कारण भारत को अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड पैक्ट पर फिर से विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।

रेसिप्रोकल टैरिफ और नई शुल्क संरचना

रेसिप्रोकल टैरिफ वह शुल्क है जो अमेरिका उन देशों पर लगाता है जो अमेरिकी सामान पर उच्च आयात शुल्क वसूलते हैं और 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित 60 देशों पर इन शुल्कों की घोषणा की थी। भारत पर पहले यह शुल्क 25% तय किया गया था, जिसे रूसी कच्चे तेल की खरीद के कारण बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया था। हालांकि, फरवरी में हुए एक अंतरिम समझौते के बाद इसे घटाकर 18% करने का प्रस्ताव था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की नई घोषणा के बाद, भारतीय सामानों पर 24 फरवरी 2026 से केवल 10% की अतिरिक्त लेवी लगेगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उत्पाद पर 5% की सामान्य ड्यूटी लगती है, तो अब प्रभावी शुल्क 15% होगा, जो पहले की तुलना में काफी कम है।

भारत-अमेरिका ट्रेड पैक्ट पर पुनर्विचार की मांग

थिंक टैंक GTRI ने सुझाव दिया है कि चूंकि भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटकर 10% रह गया है, इसलिए भारत को व्यापार समझौते की शर्तों का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पहले अमेरिका के लिए अपने टैरिफ कम करने पर इसलिए सहमत हुआ था क्योंकि वाशिंगटन ने भारत के लिए शुल्क घटाकर 18% करने का वादा किया था। अब जबकि अमेरिका ने सभी देशों के लिए इसे एक समान 10% कर दिया है, तो भारत को मिलने वाला विशेष लाभ कम हो गया है। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, व्यापारिक सौदे दोनों पक्षों के लाभ पर आधारित होने चाहिए और वर्तमान स्थिति में भारत के हितों का नए सिरे से विश्लेषण जरूरी है।

छूट प्राप्त श्रेणियां और सेक्टोरल टैरिफ

व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कुछ विशिष्ट श्रेणियों को इस 10% ग्लोबल टैरिफ से छूट दी गई है। इनमें आवश्यक खनिज, ऊर्जा उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और कुछ कृषि उत्पाद जैसे बीफ, टमाटर और संतरे शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और यात्री वाहनों के पुर्जों को भी राहत दी गई है। हालांकि, स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर लगने वाले 50% के सेक्टोरल टैरिफ और कुछ ऑटो घटकों पर 25% का शुल्क पहले की तरह जारी रहेगा। यह छूट अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को ध्यान में रखते हुए दी गई है।

द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े और वर्तमान स्थिति

वर्ष 2021-25 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18% है। 3 बिलियन डॉलर रहा। भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) 41 बिलियन डॉलर का है। मुख्य निर्यात वस्तुओं में दवाएं, टेलीकॉम उपकरण, कीमती पत्थर और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं। अमेरिका का तर्क है कि भारत के साथ उसका व्यापार घाटा अधिक है, जिसे कम करने के लिए वह टैरिफ का उपयोग कर रहा है।

भविष्य की रणनीति और वार्ता का कार्यक्रम

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय टीम 23 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करेगी। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अगले महीने इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद भारत के साथ होने वाली डील में कोई बदलाव नहीं होगा। 150 दिनों की अस्थायी अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका की टैरिफ नीति क्या होगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

SUBSCRIBE TO OUR NEWSLETTER