अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का विशेष अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति अपनी कार्यकारी शक्तियों का उपयोग करके इस तरह के व्यापक आर्थिक कर नहीं थोप सकते। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की प्रमुख आर्थिक नीति के लिए एक बड़े कानूनी झटके के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 1, धारा 8 के तहत राजस्व जुटाने और व्यापार को विनियमित करने की शक्ति विधायिका में निहित है।
भारत के लिए बड़ी राहत और शुल्क में कटौती
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत को व्यापारिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच पहले हुए व्यापारिक समझौतों के तहत भारतीय उत्पादों पर 18% टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद, ट्रंप ने एक नया आदेश जारी किया है और इस नए आदेश के तहत अब भारत समेत सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर केवल 10% का एकसमान वैश्विक टैरिफ लागू होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारतीय निर्यातकों को अब अमेरिका में अपने उत्पाद भेजने के लिए पहले की तुलना में 8% कम शुल्क देना होगा। यह बदलाव उन सभी देशों पर लागू होगा जिन्होंने पहले उच्च टैरिफ दरों पर सहमति जताई थी।
धारा 122 और ट्रंप का नया कार्यकारी आदेश
सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के मात्र 3 घंटे के भीतर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' की धारा 122 का उपयोग करते हुए 10% वैश्विक टैरिफ की घोषणा कर दी। धारा 122 अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देती है कि यदि देश को अचानक व्यापार घाटे या गंभीर आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे अस्थायी रूप से आयात पर शुल्क लगा सकते हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस नए टैरिफ को लागू करने के लिए उन्हें संसद की अनुमति की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह उनके कार्यकारी अधिकारों के अंतर्गत आता है। यह नया टैरिफ 24 फरवरी की आधी रात से प्रभावी हो जाएगा। व्हाइट हाउस के दस्तावेजों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर के बाहरी प्रवाह को रोकना और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
न्यायपालिका पर ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है और जजों के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कहा कि यह फैसला देश के लिए निराशाजनक है और ट्रंप ने उन जजों को 'कट्टर वामपंथियों के पालतू' बताया जिन्होंने टैरिफ के खिलाफ मतदान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन जजों में देश के हित में कड़े फैसले लेने का साहस नहीं है। हालांकि, उन्होंने उन तीन रूढ़िवादी जजों की प्रशंसा की जिन्होंने इस फैसले पर असहमति जताई थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह कानूनी लड़ाई लंबी चलेगी और उन्हें उम्मीद है कि अगले 5 वर्षों तक यह मामला अदालतों में बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार पहले वसूले गए टैरिफ का कोई रिफंड नहीं देगी।
छूट प्राप्त उत्पाद और कार्यान्वयन की समयसीमा
नए टैरिफ आदेश में कुछ विशिष्ट श्रेणियों को छूट प्रदान की गई है। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, कृषि उत्पाद जैसे बीफ, टमाटर और संतरा इस 10% टैरिफ के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण खनिज, जीवन रक्षक दवाइयां, कुछ विशेष इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहनों को भी इस शुल्क से राहत दी गई है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने यह भी जानकारी दी है कि अधिकांश प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ धारा 301 के तहत नई जांच शुरू की जाएगी। यह टैरिफ व्यवस्था 24 फरवरी से लागू होगी और प्रारंभिक तौर पर 150 दिनों तक प्रभावी रह सकती है, जिसके बाद सरकार स्थिति की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए उठाया गया है।
