स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला तो परमाणु समझौते से पीछे हट सकते हैं ट्रंप, ईरान ने रखी कड़ी शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए परमाणु समझौते के बजाय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को प्राथमिकता दे सकते हैं, जबकि ईरान ने इसके बदले भारी आर्थिक और सैन्य रियायतों की मांग की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को समाप्त करने के लिए अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव कर सकते हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अब परमाणु समझौते पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और वहां समुद्री यातायात को पूरी तरह बहाल करने को प्राथमिकता दे सकते हैं। रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप ने अपने करीबी अधिकारियों को संकेत दिए हैं कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और निर्बाध बनाने पर सहमत होता है, तो अमेरिका परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष को खत्म करने का रास्ता तलाश सकता है। यह कदम इस बात का संकेत है कि ट्रंप प्रशासन अब परमाणु मुद्दे के बजाय वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को अधिक महत्व दे रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व और वर्तमान स्थिति

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस मार्ग का खुला रहना अनिवार्य है, लेकिन पिछले कुछ समय से ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरों के कारण यहां समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के हफ्तों में कई बार यह दावा किया है कि होर्मुज पूरी तरह से खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत और ईरान का रुख इससे काफी अलग है और तेहरान ने इस मार्ग से अमेरिकी युद्धपोतों और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के गुजरने पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसके अलावा, ईरान ने एक नया प्रस्ताव रखा है जिसमें व्यावसायिक जहाजों से इस मार्ग के इस्तेमाल के बदले शुल्क लेने की बात कही गई है, जिसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन बताते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

ईरान की शर्तों की लंबी सूची और कड़ा रुख

ईरान ने होर्मुज को फिर से खोलने के लिए ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिनसे किसी भी समझौते तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर ज़ोलघद्र ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक मार्ग को पूरी तरह बहाल करना संभव नहीं होगा। ईरान की मांगों में अमेरिका द्वारा युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना, नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी शामिल है। इसके अलावा, तेहरान ने अमेरिका से ईरान पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाने और विदेशों में जब्त की गई ईरान की संपत्तियों को जारी करने की मांग की है। ईरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में अरबों डॉलर के भुगतान की भी मांग की है। तेहरान चाहता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी धमकियां और बयानबाजी बंद करे और क्षेत्र में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को भी पूरी तरह रोक दे।

ट्रंप के लिए घरेलू राजनीति और मध्यावधि चुनाव की चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप पर इस संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने का घरेलू दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में अब 3 महीने से भी कम का समय बचा है और युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें पहले के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। आम जनता में बढ़ती महंगाई को लेकर असंतोष है, जो चुनावों में ट्रंप की पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है और ऐसे में ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस संघर्ष को इस तरह समाप्त करें कि इसे अमेरिका में एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश किया जा सके। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल होना उनके लिए एक ऐसा राजनीतिक आधार बन सकता है, जिससे वह तेल की कीमतों को कम करने और अपनी छवि को एक शांतिदूत के रूप में सुधारने का प्रयास कर सकते हैं।

परमाणु मुद्दे को पीछे रखने के पीछे का तर्क

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सबसे पुराना और बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। ट्रंप प्रशासन ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ट्रंप ने हाल की बैठकों में अपने अधिकारियों से कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं को पहुंचाए गए नुकसान के बाद अब तेहरान के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करना बहुत मुश्किल होगा। ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी खुफिया तंत्र इतना सक्षम है कि वह ईरान की किसी भी नई परमाणु गतिविधि का तुरंत पता लगा सकता है। उनका यह भी मानना है कि भविष्य में सैन्य कार्रवाई की केवल धमकी ही ईरान को दोबारा परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ने से रोकने के लिए पर्याप्त होगी। इसी सोच के कारण ट्रंप प्रशासन अब परमाणु समझौते को तत्काल हासिल करने के बजाय होर्मुज में समुद्री यातायात बहाल कराने को अपनी पहली प्राथमिकता बना रहा है।

आर्थिक मांगें और समझौते की राह में अड़चनें

किसी भी संभावित समझौते में सबसे बड़ी बाधा ईरान की आर्थिक मांगें साबित हो सकती हैं और तेहरान अरबों डॉलर की युद्ध क्षतिपूर्ति और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों को तुरंत जारी करने की मांग पर अड़ा हुआ है। ट्रंप पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा किसी भी स्थिति में ईरान को नहीं दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि किसी समझौते तक पहुंचने के लिए ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियों को कड़ी शर्तों के साथ जारी किया जा सकता है और इसके अलावा, ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से तेल बेचने की अनुमति देना और कुछ प्रतिबंधों में ढील देना भी बातचीत का मुख्य हिस्सा होगा। यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह बहाल करने पर सहमत होता है, तो ट्रंप के पास परमाणु समझौते के बिना भी संघर्ष समाप्त करने का एक विकल्प होगा। लेकिन ईरान की मौजूदा मांगें बताती हैं कि आने वाले दिनों में बातचीत का केंद्र परमाणु कार्यक्रम से हटकर होर्मुज, प्रतिबंधों और आर्थिक मुआवजे पर केंद्रित रहेगा।