क्या होर्मुज स्ट्रेट बनेगा अमेरिका का हिस्सा? ट्रंप के दावे और अंतरराष्ट्रीय कानून की हकीकत

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को हराने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का बड़ा दावा किया है। हालांकि, UNCLOS के अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत यह संभव नहीं है क्योंकि इस 34 किमी चौड़े जलमार्ग पर ईरान और ओमान की संप्रभुता सुरक्षित है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ जारी युद्ध में जीत हासिल करने के बाद अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को अपना क्षेत्र घोषित कर देगा। 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध और अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई सख्त नाकेबंदी के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को अपनी मर्जी से अपना हिस्सा घोषित करना कानूनी रूप से लगभग असंभव है।

होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति और महत्व

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री रास्ता है। इसके उत्तरी किनारे पर ईरान स्थित है, जबकि दक्षिणी किनारे पर ओमान और संयुक्त अरब अमीरात की सीमाएं लगती हैं। अपनी सबसे संकरी जगह पर इस जलमार्ग की चौड़ाई मात्र 34 किलोमीटर है। भौगोलिक और कानूनी दृष्टिकोण से यह पूरा क्षेत्र ईरान और ओमान की समुद्री सीमाओं के भीतर आता है, न कि अमेरिका की।

क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS)?

समुद्रों पर अधिकारों को लेकर पूरी दुनिया में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का पालन किया जाता है, जिसे समुद्रों का संविधान भी कहा जाता है। होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य के लिए इस संधि के नियम बहुत स्पष्ट हैं। संधि का अनुच्छेद 34 यह साफ करता है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट से गुजरने का अधिकार वहां के तटीय देशों की संप्रभुता को प्रभावित नहीं करता है। इसका अर्थ यह है कि होर्मुज स्ट्रेट के पानी, उसके नीचे की जमीन और उसके ऊपर के आसमान पर कानूनी रूप से केवल ईरान और ओमान का ही अधिकार रहेगा। कोई भी तीसरा देश, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, इसे अपनी टेरिटरी घोषित नहीं कर सकता।

ट्रांजिट पैसेज का अधिकार और ट्रंप का राजनीतिक मकसद

UNCLOS का अनुच्छेद 38 दुनिया भर के जहाजों को ऐसे स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के गुजरने का ट्रांजिट पैसेज अधिकार देता है। इसका मतलब है कि सभी देशों के व्यापारिक और सैन्य जहाजों को यहां से तेजी से गुजरने की आजादी है और ट्रंप का यह दावा कि होर्मुज अमेरिका का हिस्सा बनेगा, कानूनी से ज्यादा नियंत्रण की राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है। युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया है और कई जहाजों को रोका है, जिसके जवाब में अमेरिका ने नाकेबंदी की है। ट्रंप ने 12 अगस्त को दावा किया था कि होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है, लेकिन हकीकत यह है कि जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हो पाई है। युद्ध से पहले जहां रोजाना 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल 14 जहाज प्रतिदिन रह गई है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर युद्ध और तनाव का असर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के ऊर्जा कारोबार की जीवनरेखा है। आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही में यहां से रोजाना औसतन 2 करोड़ 4 लाख बैरल तेल गुजरता था, जो 2026 की पहली तिमाही में युद्ध के कारण घटकर 1 करोड़ 46 लाख बैरल रोजाना रह गया है। इसी तरह, एलएनजी की आपूर्ति भी 11 और 70 करोड़ क्यूबिक फीट से घटकर 7 और 30 करोड़ क्यूबिक फीट प्रतिदिन पर आ गई है। इसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे एशियाई देशों पर पड़ रहा है, क्योंकि 2024 में यहां से गुजरने वाली कुल एलएनजी आपूर्ति का 83 प्रतिशत हिस्सा एशिया गया था, जिसमें से 52 प्रतिशत हिस्सा भारत, चीन और दक्षिण कोरिया को मिला था। तनाव बढ़ने के कारण 14 अगस्त को ब्रेंट क्रूड की कीमत 1 डॉलर 45 सेंट बढ़कर 88 डॉलर 52 सेंट प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो एक हफ्ते में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।