बलूचिस्तान में F-16 से नरसंहार: ट्रंप की चुप्पी पर उठे सवाल, बलूच नेताओं ने की सैन्य मदद रोकने की मांग

पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान में अमेरिकी F-16 विमानों के इस्तेमाल और 30 नागरिकों की मौत पर बलूच नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए हैं और सैन्य मदद रोकने की मांग की है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों के गंभीर हनन और सैन्य अत्याचारों के बीच अब अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की भूमिका पर सबसे बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। बलूच संगठनों और वहां के प्रमुख नेताओं का स्पष्ट कहना है कि अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान बलूचिस्तान की अवाम का गला घोंट रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर वाशिंगटन की चुप्पी ने कई बड़े सवाल पैदा कर दिए हैं। बलूच नेतृत्व का आरोप है कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी गई सैन्य शक्ति का दुरुपयोग निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी प्रशासन इस पर कोई सख्त रुख नहीं अपना रहा है। यह चुप्पी उन अंतरराष्ट्रीय संधियों और मानवाधिकारों के दावों पर भी सवाल उठाती है जिनका अमेरिका अक्सर समर्थन करता है।

अमेरिकी हथियारों से महिलाओं और बच्चों के कत्लेआम का आरोप

बलूच संगठनों ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए इन हालिया हमलों में मरने वाले ज्यादातर लोग आम नागरिक थे। इन मृतकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह खूनी कार्रवाई ठीक उस वक्त की गई जब बलूच अवाम अपना स्वतंत्रता दिवस मना रही थी। खुशी के माहौल को मातम में बदलते हुए पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमलों का सहारा लिया। बलूच नेताओं का कहना है कि यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक पूरी नस्ल को डराने और दबाने की कोशिश है। इन हमलों के बाद जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उनकी तुलना गाजा में हुई तबाही से की जा रही है। बलूच नेतृत्व का कहना है कि जिस तरह की बर्बादी वहां देखी गई, वैसी ही स्थिति आज बलूचिस्तान के कई इलाकों में बनी हुई है।

अमेरिकी F-16 विमानों के इस्तेमाल पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे विवाद के केंद्र में अमेरिका में बने F-16 फाइटर जेट्स हैं। बलूच संगठनों और नेतृत्व का आरोप है कि पाकिस्तान ने इस खूनी हमले के लिए इन्हीं अत्याधुनिक विमानों का इस्तेमाल किया है। गौरतलब है कि अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को ये विमान और अन्य सैन्य सहायता मुख्य रूप से आतंकवाद से लड़ने के नाम पर दी जाती है। लेकिन बलूच नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान इस सैन्य ताकत का इस्तेमाल आतंकवादियों के खिलाफ करने के बजाय मासूम महिलाओं और बच्चों के कत्लेआम के लिए कर रहा है। इससे पहले भी खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में इन विमानों के गलत इस्तेमाल के आरोप लगते रहे हैं। बलूच नेतृत्व का तर्क है कि जब अमेरिका को पता है कि उसके हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के खिलाफ हो रहा है, तो वह तकनीकी सहायता और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई क्यों नहीं रोक रहा है।

मीर यार बलूच की ट्रंप प्रशासन को दो-टूक चेतावनी

इस भीषण घटना के बाद बलूच नेता मीर यार बलूच ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका की चुप्पी को पाकिस्तान अपनी क्रूरता के लिए मौन सहमति मान रहा है। बलूच नेतृत्व ने ट्रंप प्रशासन से कई सख्त और ठोस कदम उठाने की मांग की है और उनकी पहली मांग यह है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी प्रकार की सैन्य मदद पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसमें रक्षा उपकरण, हथियार और हर तरह की वित्तीय सहायता शामिल है और बलूच नेताओं का कहना है कि जब तक पाकिस्तान को यह मदद मिलती रहेगी, वह बलूचिस्तान में अपना दमन चक्र जारी रखेगा। उन्होंने मांग की है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली हर एक डॉलर की वित्तीय सहायता की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि उसका इस्तेमाल निर्दोषों के खून बहाने में न हो सके।

F-16 के स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहयोग बंद करने की मांग

बलूच नेतृत्व ने विशेष रूप से F-16 विमानों के संचालन को लेकर अमेरिका से कड़ा रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स के पास मौजूद F-16 विमानों के लिए इंजन सपोर्ट, अपग्रेड प्रोग्राम और किसी भी तरह की रिपेयरिंग या तकनीकी मदद को अमेरिका तुरंत बंद कर दे। उनका मानना है कि अगर अमेरिका इन विमानों के स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई रोक देता है, तो पाकिस्तान के लिए इनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा और इसके साथ ही बलूच नेताओं ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की है। उनका कहना है कि बलूच नागरिकों के खिलाफ जो कुछ भी हो रहा है, वह सीधे तौर पर युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में मुकदमा चलना चाहिए।

पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित करने की अपील

बलूच नेतृत्व ने अपनी मांगों को और कड़ा करते हुए अमेरिका से अपील की है कि पाकिस्तान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएं। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मांग की है कि पाकिस्तान को आधिकारिक तौर पर आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश (State Sponsor of Terrorism) घोषित किया जाए। बलूच नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान न केवल अपने भीतर दमन कर रहा है, बल्कि वह क्षेत्रीय अस्थिरता का भी कारण है। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की कसम खाई है और अफगानिस्तान सहित अन्य पड़ोसी देशों से भी समर्थन मांगा है और हालिया हमलों में 30 नागरिकों की मौत की पुष्टि करते हुए बलूच नेतृत्व ने कहा है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अब सबकी नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप मानवाधिकारों के पक्ष में खड़े होंगे या पाकिस्तान की सैन्य मशीनरी को खाद-पानी देना जारी रखेंगे।