इराक से अमेरिकी सेना की पूर्ण विदाई: 23 साल पुराने सैन्य अध्याय का अंत और मिडिल ईस्ट में नया शक्ति संतुलन

अमेरिका ने इराक से अपनी सैन्य वापसी आधिकारिक रूप से पूरी कर ली है। 2003 में सद्दाम हुसैन के पतन से शुरू हुआ यह सफर 23 साल बाद समाप्त हुआ है। इस बदलाव से पश्चिम एशिया की सुरक्षा और ईरान के प्रभाव को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी तनावपूर्ण संघर्ष के बीच, अमेरिका ने आज बुधवार को इराक से अपनी सैन्य वापसी आधिकारिक रूप से पूरी कर ली है। इसके साथ ही साल 2003 में सद्दाम हुसैन की सरकार के पतन के बाद शुरू हुई अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का 23 साल से चले आ रहे एक लंबे और घटनापूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। यह कदम न केवल एक सैन्य वापसी है, बल्कि यह पूरे खाड़ी क्षेत्र और पश्चिम एशिया के शक्ति संतुलन में एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और द्विपक्षीय सुरक्षा संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिकों की अनुपस्थिति एक नए युग की शुरुआत है।

23 साल का ऐतिहासिक सफर और सैन्य तैनाती

अमेरिका के नेतृत्व वाली सेनाओं ने 20 मार्च 2003 को इराक पर हमला कर दिया था। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य परिणाम सद्दाम हुसैन की सत्ता का पतन था। इसके बाद के वर्षों में इराक में अमेरिका का दबदबा लगातार बढ़ता गया और एक समय ऐसा भी आया जब इराक में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बहुत अधिक हो गई थी। साल 2007 तक अमेरिकी तैनाती अपने चरम पर पहुंच गई थी, और इस दौरान इराक में 1 लाख 70 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। यह वह दौर था जब अमेरिका इराक की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य आधार बना हुआ था।

हालांकि, यह सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। दिसंबर 2011 में अमेरिका ने अपने अंतिम लड़ाकू सैनिकों को वापस बुला लिया था, जिससे लगा था कि अमेरिकी सैन्य भूमिका समाप्त हो गई है। लेकिन 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के तीव्र और हिंसक उभार ने स्थिति बदल दी। इसके बाद अमेरिकी सेना को ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के तहत फिर से इराक में लौटना पड़ा। इस मिशन का उद्देश्य आईएसआईएस के खिलाफ इराकी बलों की सहायता करना और आतंकवाद को जड़ से मिटाना था।

2024 का समझौता और अंतिम विदाई

वाशिंगटन और बगदाद के बीच 2024 में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के मिशन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का निर्णय लिया गया था। इस समझौते के तहत अंतिम समयसीमा 30 सितंबर 2026 तय की गई थी। लेकिन इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया गया और अंतिम चरण में सक्रिय करीब 1500 से 2500 अमेरिकी और गठबंधन कर्मी भी अब इराक छोड़ चुके हैं। इस विदाई के साथ ही इराक में अमेरिकी सैन्य अभियानों का औपचारिक समापन हो गया है।

सुरक्षा के सामने खड़ी तीन बड़ी चुनौतियां

अमेरिकी सैनिकों की इस अंतिम विदाई के बाद इराक के आंतरिक और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के सामने तीन मुख्य और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहला, ईरान समर्थित मिलिशिया और क्षेत्रीय प्रभाव का मुद्दा है। अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव के सामने एक बड़ा अवरोध मानी जाती थी। अमेरिका की वापसी से तेहरान और उसके समर्थक सशस्त्र समूहों को राजनीतिक तथा सुरक्षा व्यवस्था में अपना प्रभाव और मजबूत करने का बड़ा मौका मिल सकता है और अब इराकी सरकार के सामने इन गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के हथियारों को राज्य के नियंत्रण में लाने की एक बड़ी चुनौती है।

दूसरा बड़ा खतरा ISIS के स्लीपर सेल का बना हुआ है। भले ही ISIS का क्षेत्रीय नियंत्रण खत्म हो चुका है, लेकिन उसके स्लीपर सेल अभी भी सक्रिय हैं और समय-समय पर हमले करते रहते हैं। अमेरिकी खुफिया जानकारी, ड्रोन निगरानी और लॉजिस्टिक सहायता मिलने बंद होने से इराकी सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियानों में स्वतंत्र रूप से अधिक कड़े कदम उठाने होंगे। अमेरिका अब इस क्षेत्रीय निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियान के ढांचे को जॉर्डन से संचालित करने की योजना बना रहा है।

एयर डिफेंस क्षमता और भविष्य का संतुलन

तीसरी बड़ी चुनौती एयर डिफेंस क्षमता में बदलाव है। अमेरिकी सेना के जाने से एरबिल (इराकी कुर्दिस्तान) और अन्य ठिकानों से पैट्रियट (Patriot) एयर डिफेंस सिस्टम और रडार प्रणालियां हटा ली गई हैं। मौजूदा ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच हवाई हमलों के खतरों से निपटने के लिए इराक को अब अपनी खुद की राष्ट्रीय एकीकृत एयर डिफेंस प्रणाली को जल्द से जल्द मजबूत करना होगा। यह विदाई केवल सैनिकों की वापसी भर नहीं है, बल्कि यह इराक की घरेलू राजनीति और मध्य-पूर्व की भू-राजनीति का एक नया अध्याय है। युद्ध के इन 2 दशकों में करीब 4500 अमेरिकी सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। अब अमेरिकी सैन्य मिशन के अंत के बाद, यह देखना बेहद अहम होगा कि बगदाद सरकार अपनी संप्रभुता, आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन को किस प्रकार संभालती है, या इस पूरे क्षेत्र में ईरान का दबदबा कायम होगा।