बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस: पाकिस्तानी सेना के विरोध के बावजूद बलूचों ने मनाया आजादी का जश्न

बलूचिस्तान में 11 अगस्त को बलूच नागरिकों ने पाकिस्तानी सेना के कड़े पहरे के बावजूद अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। बलूच नेताओं ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करते हुए दुनिया से मान्यता की अपील की है और नई मुद्रा 'बलोची फालूस' का ऐलान किया है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान में आज बलूच समुदाय के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस ऐतिहासिक अवसर पर पाकिस्तानी सेना द्वारा जश्न को रोकने की तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन बलूच नागरिकों के हौसले के आगे वे नाकाम रहीं। बलूचिस्तान के विभिन्न शहरों में आजादी के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो पाकिस्तान के खिलाफ एक खुली बगावत का संकेत हैं। बलूच नेताओं ने अब आधिकारिक तौर पर बलूचिस्तान को एक आजाद मुल्क घोषित कर दिया है और दुनिया के तमाम देशों से यह पुरजोर अपील की है कि अब बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा न माना जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की नजर से देखा जाए।

6 करोड़ लोगों ने फहराया आजादी का परचम

आज के दिन बलूचिस्तान के लगभग 6 करोड़ लोगों ने एकजुट होकर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। पूरे बलूचिस्तान क्षेत्र में जगह-जगह बलूच राष्ट्रध्वज फहराए गए और आजादी के तराने गाए गए। यह आयोजन केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं था, बल्कि यह बलूच जनता की दशकों पुरानी आजादी की तड़प का प्रदर्शन था। बलूच नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि वे अब किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के शासन को स्वीकार नहीं करेंगे। 6 करोड़ की आबादी वाले इस क्षेत्र में लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी पहचान और अपनी धरती की आजादी के लिए आवाज बुलंद की।

बंदूक और तोपों के साये में मना जश्न

स्वतंत्रता दिवस के इन कार्यक्रमों में खलल डालने के लिए पाकिस्तानी फौज ने कई साजिशें रचीं। बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच के अनुसार, पूरे बलूचिस्तान में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी और पाकिस्तानी प्रशासन ने रैलियां निकालने और जलसे आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं, लोगों के बीच संपर्क को तोड़ने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को भी ठप कर दिया गया था। इन तमाम पाबंदियों के बावजूद, पाकिस्तानी फौज बलूचों के जज्बे को दबाने में विफल रही। बलूच नागरिकों ने तोपों और बंदूकों के साये में भी निडर होकर अपनी आजादी का जश्न मनाया और दुनिया को अपनी अटूट इच्छाशक्ति का परिचय दिया।

शहर-शहर गूंजा बलोच राष्ट्रगान

बलूचिस्तान के प्रमुख शहरों जैसे क्वेटा, नोश्की, कलात, ग्वादर, तुरबत और खुजदार में सुबह से ही स्वतंत्रता दिवस के समारोहों की धूम रही और इन कार्यक्रमों के दौरान बलोच नेशनल एंथेम यानी राष्ट्रगान गाया गया और लोगों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बलूच संस्कृति और इतिहास की झलक देखने को मिली। इस दौरान पाकिस्तानी फौज मूकदर्शक बनी रही और वह इन आयोजनों को रोकने में पूरी तरह असमर्थ रही। बलूच नेताओं ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब 14 अगस्त को बलूचिस्तान का कोई भी नागरिक पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाएगा, जो पाकिस्तान से उनके पूर्ण अलगाव की पुष्टि करता है।

79 सालों का संघर्ष और पाकिस्तान का अवैध कब्जा

बलूचिस्तान की आजादी का इतिहास काफी पुराना है और साल 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हो रहा था, तब बलूचिस्तान क्षेत्र में स्थित कलात रियासत ने अपनी पूर्ण आजादी की घोषणा की थी। तभी से लेकर पिछले 79 सालों से बलूचिस्तान के लोग हर साल 11 अगस्त को अपना असली स्वतंत्रता दिवस मनाते आ रहे हैं। हालांकि, 1947 में आजादी की घोषणा के एक साल के भीतर ही पाकिस्तान ने सैन्य बल का प्रयोग कर बलूचिस्तान के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया था। इस कब्जे के खिलाफ बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता का संघर्ष आज भी लगातार जारी है।

आजाद देश की घोषणा और नई मुद्रा 'बलोची फालूस'

हाल ही में बलोच नेता मीर यार बलोच ने 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' के नाम से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज और पोस्ट साझा किया था और इसमें उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से पर अब बलूच राष्ट्रवादियों का नियंत्रण है। इसी के साथ उन्होंने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया है। इस नए राष्ट्र के लिए एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की गई है और नए राष्ट्रध्वज व राष्ट्रगान की घोषणा भी की गई है। आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बलोचों ने 'बलोची फालूस' के नाम से अपनी नई मुद्रा का भी ऐलान किया है। इस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बलूच अलगाववादियों ने अब पाकिस्तान से पूरी तरह नाता तोड़ लिया है और वे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुके हैं।