उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका: शिंदे गुट में शामिल हुए 6 बागी सांसद, स्पीकर ने दी मान्यता

महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने यूबीटी के 6 बागी सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की आधिकारिक मान्यता दे दी है, जिससे शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 13 हो गई है।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां उद्धव ठाकरे को एक जबरदस्त झटका लगा है और लोकसभा स्पीकर ने शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की आधिकारिक मान्यता प्रदान कर दी है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की सत्ता और संगठन की लड़ाई अब राष्ट्रीय स्तर पर एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला का बड़ा फैसला

महाराष्ट्र की सियासत से आ रही इस बड़ी खबर के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने यूबीटी के 6 बागी सांसदों को शिंदे गुट की शिवसेना में जाने की मंजूरी दे दी है। लोकसभा सचिवालय से इस संबंध में औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद अब इन सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस फैसले का सीधा असर सदन के भीतर शक्ति संतुलन पर पड़ा है।

लोकसभा स्पीकर के इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद, निचले सदन यानी लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत में इजाफा हुआ है। अब लोकसभा में शिंदे गुट के कुल सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जिससे सदन की कार्यवाही और विधायी प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावी हो जाएगी।

कौन हैं वे 6 सांसद जिन्होंने बदला पाला

शिवसेना (यूबीटी) के जिन 6 सांसदों ने बगावत कर शिंदे गुट का दामन थामा है, उनके विलय का उद्धव ठाकरे ने कड़ा विरोध किया था। हालांकि, अब आधिकारिक मान्यता मिलने के बाद ये सभी सांसद शिंदे गुट का हिस्सा बन चुके हैं।

  • परभणी से सांसद संजय जाधव
  • मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल
  • उस्मानाबाद/धाराशिव से सांसद ओमराज निंबालकर
  • हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर
  • यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय उत्तमराव देशमुख
  • शिर्डी से सांसद भाऊ साहेब वाकचौरे

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया और ऑपरेशन टाइगर

ऑपरेशन टाइगर की सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "जो लोग हमारे साथ जुड़ रहे हैं, वे भरोसे की वजह से ऐसा कर रहे हैं। चाहे सांसद हों या वे कई अन्य लोग जो पिछले 3-4 सालों में हमारे साथ जुड़े हैं, उन्हें शिवसेना, मुझ पर और हमारी टीम पर पूरा भरोसा है।

उन्होंने आगे कहा, "हम पार्टियां तोड़ने या फूट डालने का काम नहीं करते। हम जोड़ने वाले लोग हैं। हम यहां उनके चुनाव क्षेत्रों के लोगों को न्याय दिलाने और जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए आए हैं।

ममता बनर्जी और टीएमसी को भी लगा झटका

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी एक बड़ा झटका लगा है। स्पीकर ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर एनसीपीआई में विलय करने वाले 20 सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। एनसीपीआई को अब सदन में एक अलग ग्रुप का दर्जा दे दिया गया है।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष को एनसीपीआई नेता के तौर पर सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती और झटके के रूप में देखा जा रहा है।