लोकसभा स्पीकर ने शिवसेना शिंदे गुट के विलय और टीएमसी बागियों को दी मान्यता

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दे दी है। साथ ही टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों को भी अलग बैठने की अनुमति मिली है।

भारतीय संसद के निचले सदन में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के लिए एक बड़ी संवैधानिक जीत माना जा रहा है, जिससे सदन में उनकी स्थिति और मजबूत हुई है। इसके साथ ही, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हुई बड़ी टूट के बाद, पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों को भी लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति मिल गई है। ये सभी सांसद नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं और अब उन्हें सदन में एक अलग समूह के रूप में मान्यता दी गई है।

सर्वदलीय बैठक और संसदीय कार्ययोजना

संसद के आगामी मानसून सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सक्रियता दिखाई है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता और सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के साथ-साथ 19 अन्य लोकसभा सांसदों को रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह बैठक सत्र शुरू होने से पहले की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें सरकार और विपक्षी दलों के बीच विधायी कार्यों पर चर्चा की जाती है।

किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि सुदीप बंद्योपाध्याय और 19 अन्य सांसद हाल ही में एनसीपीआई में शामिल हुए हैं और उन्होंने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष से अपनी नई पहचान के लिए अनुरोध किया था, जो उनके विचाराधीन था। मंत्री ने उन्हें लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक के लिए आमंत्रित करते हुए खुशी जताई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान सदनों के सामने आने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों और विधायी कार्यों पर विस्तार से चर्चा करना है और रिजिजू ने संसद के दोनों सदनों में कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी सांसदों के सहयोग की अपेक्षा की है।

मानसून सत्र 2026 का कार्यक्रम

संसद की यह महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक 19 जुलाई को सुबह 11 बजे पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की जाएगी। किरेन रिजिजू ने विशेष रूप से सुदीप बंद्योपाध्याय और डॉ काकोली घोष दस्तीदार को इस बैठक में उपस्थित रहने का अनुरोध किया है, जिन्हें एनसीपीआई के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के रूप में नामित किया गया है। यह बैठक 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले होगी। इस दौरान सरकार राजनीतिक दलों को अपने विधायी एजेंडे के बारे में जानकारी देगी, जबकि विपक्षी दल उन मुद्दों को सामने रखेंगे जिन्हें वे सत्र के दौरान उठाना चाहते हैं।

इससे पहले, संसदीय कार्य मंत्री ने घोषणा की थी कि मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत सरकार की सिफारिश पर, माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानसून सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 20 जुलाई, 2026 को शुरू होगा और 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक उथल-पुथल

हाल के समय में कई विपक्षी दलों में आंतरिक फूट देखने को मिली है, जिसका असर आगामी सत्र में भी दिखने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल तब शुरू हुई जब विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की हार के बाद उसके 20 सांसद नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो गए और लोकसभा में अलग पहचान की मांग की। इसके अलावा, टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। शिवसेना (यूबीटी) में भी इसी तरह की फूट पड़ी, जहां छह लोकसभा सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ चले गए।

राजनीतिक बदलाव का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हो गए हैं और आगामी सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा नीट-यूजी पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को उठाने की पूरी संभावना है। इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हताहतों के संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणियों पर भी विवाद गरमा सकता है। कांग्रेस पार्टी ने रक्षा मंत्री की टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस पहले ही दे दिया है। दूसरी ओर, सरकार इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने और उन पर चर्चा करने की तैयारी में है।