महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगने की संभावना जताई जा रही है। खबरों के अनुसार, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शिवसेना यूबीटी के 9 में से 7 लोकसभा सांसदों और 16 में से 14 विधायकों को अपने पाले में लाने की तैयारी कर रहे हैं। यह घटनाक्रम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए एक गंभीर अस्तित्व का संकट खड़ा कर सकता है।
सांसदों की बगावत का खाका
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि शिवसेना यूबीटी के लोकसभा सांसदों में बड़ी टूट होने वाली है। जानकारी के मुताबिक, पार्टी के कुल 9 सांसदों में से 7 सांसद बगावत का रास्ता चुन सकते हैं। ये 7 सांसद पहले एक अलग गुट बनाएंगे और उसके बाद आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में अपना विलय कर लेंगे। इस रणनीति के तहत वे अपनी सदस्यता बचाने और शिंदे गुट को मजबूती देने का प्रयास करेंगे।
बगावत में शामिल प्रमुख नाम
दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कई दिग्गज सांसद इस बगावत में शामिल हैं। इन बागी सांसदों की सूची में भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख, अरविंद सावंत, संजय जाधव, संजय पाटिल, नागेश बापूराव अष्टिकर, श्री राजाभाऊ वाजे और संजय दिना पाटील के नाम सामने आ रहे हैं। इन नामों के सामने आने से यूबीटी खेमे में खलबली मच गई है, क्योंकि इनमें से कई नेता पार्टी के पुराने और भरोसेमंद चेहरे माने जाते रहे हैं। इन नेताओं का जाना पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति साबित हो सकता है।
दिल्ली में हलचल और बचाव की कोशिशें
सूत्रों के हवाले से खबर है कि यह टूट कल या परसों के भीतर ही हो सकती है। बागी गुट के सदस्य लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं। इस संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी अनिल देसाई और संजय राउत इस समय दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं। वे सांसदों से संपर्क साधने और उन्हें पार्टी में बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि स्थापना दिवस से पहले इस बड़े झटके को टाला जा सके।
विधायकों पर भी मंडरा रहा खतरा
बगावत की यह लहर केवल सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि विधायकों के बीच भी भारी असंतोष की खबरें हैं। एकनाथ शिंदे की पार्टी के नेता और विधायक कृपाल तुमाणे ने एक सनसनीखेज दावा किया है। उनके मुताबिक, संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू होने से पहले ही 7 सांसद अपना अलग गुट बना लेंगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि उद्धव ठाकरे के पास बचे 16 विधायकों में से 14 विधायक पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं। तुमाणे का कहना है कि इन सभी जनप्रतिनिधियों ने अपना फैसला ले लिया है और वे जल्द ही शिंदे गुट का हिस्सा होंगे।
