यूपी राज्यसभा चुनाव: तीसरे उम्मीदवार पर अखिलेश यादव की सस्पेंस भरी रणनीति, बीजेपी की चाल का इंतजार

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी अपने तीसरे प्रत्याशी का पत्ता नामांकन के आखिरी दिन खोल सकती है। अखिलेश यादव बीजेपी की रणनीति पर नजर रखे हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला आगामी चुनाव अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही अपने निर्धारित कोटे से एक अतिरिक्त प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारने की गंभीर तैयारी कर रही हैं। ऐसी स्थिति में, यदि दोनों पक्षों की ओर से अतिरिक्त उम्मीदवार सामने आते हैं, तो राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होना पूरी तरह से तय माना जा रहा है और इससे निर्विरोध चुनाव की संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी और मुकाबला कड़ा हो जाएगा।

तीसरे प्रत्याशी पर सस्पेंस और अखिलेश की नजर

समाजवादी पार्टी अपने तीसरे प्रत्याशी के नाम को लेकर फिलहाल गोपनीयता बनाए हुए है। चर्चा है कि पार्टी इस नाम का खुलासा नामांकन के अंतिम दिन यानी मंगलवार, 6 अक्टूबर को कर सकती है। सपा के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीसरे प्रत्याशी का चयन कर लिया है और उनके लिए नामांकन पत्र भी पूरी तरह से तैयार करवा लिया गया है। हालांकि, सपा नेतृत्व इस समय बीजेपी की चुनावी चालों और उनकी रणनीति पर पैनी नजर रखे हुए है। बीजेपी के प्रत्याशियों की सूची और उनकी कुल संख्या स्पष्ट होने के बाद ही समाजवादी पार्टी अपने तीसरे उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा करेगी।

बीजेपी की चाल के बाद सपा खोलेगी पत्ता

सपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने अपने तीसरे प्रत्याशी को लेकर पूरी रणनीति तैयार कर ली है। फिलहाल नेतृत्व बीजेपी के कदम का इंतजार कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि सपा सोमवार को अपना तीसरा नाम सामने ला सकती है, लेकिन सबसे ज्यादा संभावना नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को अपना पत्ता खोलने की है। पार्टी चाहती है कि वह बीजेपी की रणनीति को पूरी तरह समझने के बाद ही अपना अगला कदम उठाए ताकि चुनावी गणित में कोई चूक न हो।

निर्विरोध चुनाव या फिर होगा मतदान?

मौजूदा समीकरणों के मुताबिक, अगर सपा 2 और बीजेपी 8 प्रत्याशियों तक ही सीमित रहती है, तो सभी 10 सीटों पर चुनाव निर्विरोध संपन्न हो जाएगा। लेकिन किसी भी पक्ष की तरफ से एक भी अतिरिक्त प्रत्याशी उतारे जाने की स्थिति में मतदान कराना अनिवार्य होगा। इससे पहले सपा अपने दो प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। इनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह के कंसल्टेंट धनराज नाथवानी शामिल हैं। इन दोनों नामों के बाद तीसरे नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

जीत का गणित और विधायकों का समर्थन

राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्याशी को जीत हासिल करने के लिए 36 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी। सपा का दावा है कि उसके साथ वर्तमान में जितने विधायक हैं, उनके मतों को जोड़ने के बाद तीसरे प्रत्याशी की जीत के लिए उसे करीब 5 अतिरिक्त मतों की ही जरूरत पड़ेगी। पार्टी का यह भी दावा है कि इन अतिरिक्त मतों के लिए सत्ताधारी गठबंधन के कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा संख्या और विधायकों की स्थिति को देखते हुए अधिकतम करीब 393-394 वोट पड़ने की संभावना है। इसी संख्या के आधार पर राज्यसभा की 10 सीटों के लिए जीत का पूरा गणित तय किया जाएगा।

नामांकन और मतदान की महत्वपूर्ण तारीखें

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। यानी मंगलवार तक सभी राजनीतिक दलों को अपने प्रत्याशियों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करनी होगी। इस चुनाव के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना तय किया गया है। इस चुनाव में विधानसभा के निर्वाचित सदस्य ही मतदान करते हैं। जैसे-जैसे नामांकन की घड़ी नजदीक आ रही है, उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज होती जा रही है।