अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास से पाकिस्तान के दो जहाजों को वापस लौटा दिया है, जिसे इस्लामाबाद के लिए एक बड़े कूटनीतिक और आर्थिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। यह घटना मंगलवार को उस समय हुई जब पाकिस्तान के ये जहाज होर्मुज के पास पहुंचे थे। अमेरिकी सेना के आदेश के बाद, अमेरिका के डर से पाकिस्तान के ये जहाज वापस लौट गए। यह कार्रवाई विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान ने पाकिस्तान के 20 जहाजों को होर्मुज से आने-जाने की विशेष अनुमति दे रखी है।
ईरान की अनुमति और अमेरिकी हस्तक्षेप
अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के झंडे लगे दो जहाजों ने मंगलवार को होर्मुज से निकलने का प्रयास किया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने उन्हें रोककर वापस जाने पर मजबूर कर दिया। ईरान ने होर्मुज से जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए पाकिस्तान को कुल 20 पास जारी किए थे। इन पासों के माध्यम से ईरान ने पाकिस्तानी जहाजों को सुरक्षा का आश्वासन दिया था और पाकिस्तान अब तक इन 20 में से 4 पास का उपयोग कर चुका है, लेकिन अब अमेरिका द्वारा जहाजों को रोके जाने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
होर्मुज में नाकाबंदी और जहाजों की आवाजाही
अमेरिका ने वर्तमान में होर्मुज के बाहर नाकाबंदी की घोषणा कर रखी है और इस सैन्य अभियान के तहत अमेरिका ने ओमान की खाड़ी और अरब सागर के क्षेत्र में लगभग 10,000 सैनिकों की तैनाती की है। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नाकाबंदी के पहले दिन कुल 20 जहाज इस रास्ते से बिना किसी बाधा के गुजरे, जिनमें चीन सहित अन्य देशों के जहाज शामिल थे। हालांकि, अमेरिकी सेना ने कुल 6 जहाजों को रोका, जिनमें से 2 जहाज पाकिस्तान के थे।
पाकिस्तान सरकार और जहाजरानी मंत्रालय की प्रतिक्रिया
इस घटना पर पाकिस्तान सरकार ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, पाकिस्तान के जहाजरानी मंत्री जुनैद अनवर चौधरी ने स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अन्य देशों की तरह पाकिस्तान को भी वर्तमान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार बातचीत कर रही है और इस समस्या का समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं। वहीं, जहाजरानी विभाग के एक अधिकारी ने अल अरबिया को बताया कि जब ईरान ने रास्ता ब्लॉक किया था तब वे इतने चिंतित नहीं थे, लेकिन अब अमेरिका द्वारा जहाजों को वापस लौटाना चिंता का विषय है।
शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रभाव
अमेरिकी सेना की यह कार्रवाई पाकिस्तान के लिए इसलिए भी अधिक संवेदनशील है क्योंकि पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता कराने में काफी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से, इस्लामाबाद में दो दिन बाद ही ईरान और अमेरिका के बीच एक संभावित 'पीस डील' (Peace Deal) पर बातचीत प्रस्तावित है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी जहाजों को रोकना द्विपक्षीय संबंधों और मध्यस्थता के प्रयासों पर सवाल खड़े करता है।
