अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष में एक बार फिर तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित लारक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाकर हमला किया। यह सैन्य कार्रवाई करीब एक महीने के अंतराल के बाद अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ की गई पहली बड़ी कार्रवाई है। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले के मुख्य निशाने पर किंग हुसैन और अल-अज्राक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले का विवरण
इससे पहले रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर स्थित दो सैन्य लॉन्चरों को अपना निशाना बनाया था। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, IRGC के जवान इन लॉन्चरों का उपयोग करके स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के महत्वपूर्ण जलमार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) पहुंचाने वाले रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी में जुटे थे और अमेरिका ने इस ईरानी गतिविधि को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए एक तत्काल और गंभीर खतरा करार दिया। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी सेनाएं इस पूरे इलाके पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए हैं और समुद्री व्यापार के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पहले ही यह चेतावनी दी थी कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में नई माइंस बिछाने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज या नाव के खिलाफ बेहद सख्त सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और हताहतों के दावे
लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी जारी की थी कि इस हमले का बदला लिया जाएगा और इसके कुछ ही समय बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने IRGC के हवाले से खबर दी कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी गई हैं। ईरानी सरकारी प्रसारणकर्ता IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले में कई ईरानी सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं और दूसरी ओर, IRGC से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अपने दावे में कहा कि इस हमले में ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया था और इसमें 2 लोगों की मौत हुई है, जबकि 2 अन्य लोग घायल हुए हैं। हालांकि, हताहतों की संख्या और हमले के प्रकार को लेकर किए गए इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
रणनीतिक केंद्र बना स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस मौजूदा टकराव में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील रणनीतिक बिंदु बनकर उभरा है और यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने का काम करता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के करीब पांचवें हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। इस संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है और दोनों देशों के बीच इस जलमार्ग के नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। अमेरिका का तर्क है कि वह अपनी सैन्य उपस्थिति के जरिए इस मार्ग पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना चाहता है, जबकि ईरान ने इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता और स्थिति को लेकर कड़ा रुख बरकरार रखा है।
लारक द्वीप का भौगोलिक और सैन्य महत्व
लारक ईरान का एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप है, जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बिल्कुल मुहाने पर स्थित है और यह द्वीप बंदर अब्बास के तट के पास स्थित है और भौगोलिक रूप से यह क़ेश्म द्वीप के पूर्व में और होर्मुज द्वीप के दक्षिण में पड़ता है। इस द्वीप का कुल क्षेत्रफल लगभग 49 वर्ग किलोमीटर है। अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण यह दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर नजर रखने के लिए एक आदर्श स्थान है। लारक द्वीप पर ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसैनिक इकाई का एक प्रमुख बेस स्थित है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज पर नजर रखने की क्षमता के कारण इस द्वीप का सैन्य महत्व ऐतिहासिक रूप से बहुत अधिक रहा है और वर्तमान संघर्ष में यह एक मुख्य मोर्चे के रूप में उभरा है।
