ईरान के आगे झुका अमेरिका? ट्रंप का 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव और यू-टर्न की रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 40 दिनों के संघर्ष के बाद नरम रुख अपनाया है। ईरान द्वारा युद्धविराम उल्लंघन के बावजूद, अमेरिका ने 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है। इसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने और फंड रिलीज करने जैसी शर्तें शामिल हैं, जिसे अमेरिका की बदलती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति तेवर अब नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। फारस की खाड़ी में 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद, अमेरिका अब सरेंडर मोड में नजर आने लगा है। ईरान द्वारा लगातार युद्धविराम का उल्लंघन किए जाने के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन संधि का प्रस्ताव लेकर तेहरान का दरवाजा खटखटा रहा है। इस 40 दिवसीय जंग ने ईरान को एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया है, जिसने सुपरपावर अमेरिका की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अमेरिकी हमलों ने ईरानी नेतृत्व को चोट पहुंचाई, लेकिन वे न तो वहां सत्ता परिवर्तन कर पाए, न परमाणु मिशन को रोक सके और न ही बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करने में सफल रहे। इसके विपरीत, इस संघर्ष ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण मजबूत करने का बड़ा अवसर प्रदान कर दिया है।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की समाप्ति और शांति की पहल

ईरान ने हाल ही में युद्धविराम की शर्तों को दरकिनार करते हुए होर्मुज स्ट्रेट से लेकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक बमबारी की है। जब पूरी दुनिया इस संघर्ष के अगले और अधिक विनाशकारी चरण की आशंका जता रही थी, तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नीति में अचानक बदलाव कर सबको चौंका दिया। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब पूरा हो चुका है और वह इस युद्ध को आगे बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब समझौते के पक्ष में है और शांति का मार्ग अपनाना चाहता है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर चर्चा करने की इच्छा जताई है ताकि क्षेत्र में जीवन सामान्य हो सके।

14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव और एक्सिओस की रिपोर्ट

अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सिओस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को एक पन्ने का संधि प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अगले 48 घंटों में समझौता होने की संभावना है। इस 14-सूत्रीय फॉर्मूले पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती दिख रही है और जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

ट्रंप की 'यू-टर्न' नीति और सुपरपावर की साख पर सवाल

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस शांति प्रस्ताव को ईरान अपनी रणनीतिक जीत के रूप में देख रहा है। ट्रंप, जिन्हें अक्सर उनके नीतिगत बदलावों के कारण 'मिस्टर यू-टर्न' कहा जाता है, एक बार फिर अपनी बातों से पलटते नजर आए हैं। उन्होंने होर्मुज में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया था, लेकिन ईरानी हमलों के दबाव में महज 48 घंटे के भीतर ही इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। ट्रंप की इस अस्थिर नीति का प्रमाण 26 और 28 फरवरी की घटनाओं से भी मिलता है, जहां एक तरफ जिनेवा में परमाणु वार्ता चल रही थी और दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया था। वर्तमान स्थिति में, अमेरिका एक ऐसे ईरान से समझौता करने को मजबूर दिख रहा है जिसने युद्ध के दौरान अपनी शर्तों और रणनीति को झुकने नहीं दिया।

डोनाल्ड ट्रंप अब इस स्थिति को डैमेज कंट्रोल के जरिए संभालने की कोशिश कर रहे हैं और उनका दावा है कि ईरान समझौते के लिए बेकरार है, जबकि जमीनी हकीकत और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट इसके विपरीत संकेत दे रही हैं। अमेरिका ने होर्मुज में अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन अब वह उसी क्षेत्र में नाकाबंदी हटाने और प्रतिबंध कम करने की बात कर रहा है। यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सुपरपावर की छवि को प्रभावित कर रहा है, क्योंकि उसे अपनी ही धमकियों के बीच कूटनीतिक समझौते का रास्ता चुनना पड़ा है।