अमेरिका का क्यूबा पर हमले का मास्टर प्लान तैयार, राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी का इंतजार

पेंटागन ने क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना तैयार कर ली है। आर्थिक प्रतिबंधों के विफल होने और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी मिलते ही अमेरिका इस साल का तीसरा हमला कर सकता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका एक और बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा है क्योंकि पेंटागन द्वारा क्यूबा के खिलाफ संभावित हमले के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने की खबरें सामने आई हैं और रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पिछले कई महीनों से इस ऑपरेशन की तैयारी में हथियारों और सैनिकों की रणनीतिक तैनाती कर रहा है। इस योजना का अंतिम क्रियान्वयन अब पूरी तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी पर निर्भर है। यदि राष्ट्रपति इस योजना को अपनी स्वीकृति देते हैं, तो यह वर्ष 2026 में अमेरिका द्वारा किया गया तीसरा बड़ा सैन्य हमला होगा।

पेंटागन ने तैयार किया ऑपरेशन का खाका

पॉलिटिको की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने क्यूबा में ऑपरेशन को लेकर अपनी पूरी योजना तैयार कर ली है और इस रणनीतिक प्लान को अंतिम निर्णय के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेज दिया गया है। अगर ट्रंप इस योजना को मंजूरी देते हैं, तो क्यूबा और अमेरिका के बीच सीधे युद्ध की शुरुआत हो सकती है और गौरतलब है कि साल 2026 में अमेरिका पहले ही दो अन्य देशों पर हमले कर चुका है, जो उसकी आक्रामक विदेश नीति को दर्शाता है।

सैन्य कार्रवाई की ओर यह झुकाव उस समय आया है जब ट्रंप प्रशासन को पहले यह उम्मीद थी कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण क्यूबा में तख्तापलट हो जाएगा। हालांकि, भारी आर्थिक और राजनीतिक दबाव के बावजूद, अमेरिका क्यूबा में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को हिलाने में नाकाम रहा है। जब यह स्पष्ट हो गया कि केवल प्रतिबंधों से शासन परिवर्तन संभव नहीं है, तब प्रशासन अब सैन्य विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

कैरेबियन क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा

पिछले काफी समय से अमेरिका कैरेबियन जलक्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को लगातार बढ़ा रहा है। इसी सैन्य कवायद के तहत मई के महीने में USS निमित्ज एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन क्षेत्र में पहुंचा। इस बेड़े के साथ कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और क्रूजर भी तैनात किए गए हैं, जो जमीन पर सटीक मिसाइल हमले करने की जबरदस्त क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, पिछले कई महीनों से अमेरिकी ड्रोन और निगरानी विमान क्यूबा की सीमाओं के आसपास सक्रिय हैं और लगातार टोह ले रहे हैं।

सुरक्षा चिंताएं और चीन का बढ़ता दखल

बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस संभावित हमले के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाला। रुबियो ने चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका के बिल्कुल करीब एक अस्थिर देश का होना अमेरिकी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने बताया कि क्यूबा में वर्तमान में काफी अस्थिरता और मुश्किलें हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस सैन्य तैयारी के पीछे एक और बड़ा कारण क्यूबा में चीन की बढ़ती सक्रियता है। हाल के दिनों में चीन ने क्यूबा के साथ कई महत्वपूर्ण सौदे किए हैं, जिससे अमेरिका की चिंताएं बढ़ गई हैं। वेनेजुएला पर नियंत्रण के प्रयासों के बाद, अब अमेरिका की कोशिश क्यूबा पर अपना प्रभाव स्थापित करने की है और इसी मिशन के तहत क्यूबा पर हमले की रूपरेखा तैयार की गई है ताकि क्षेत्र में विदेशी शक्तियों के प्रभाव को कम किया जा सके।

क्यूबा की सैन्य शक्ति और रक्षा नीति

युद्ध की स्थिति में क्यूबा की सैन्य ताकत को समझना भी जरूरी है और क्यूबा की सबसे बड़ी ताकत उसकी War of All the People यानी सभी लोगों का युद्ध की नीति है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर देश पर कोई बाहरी हमला होता है, तो केवल नियमित सेना ही नहीं, बल्कि देश का हर नागरिक, मिलिशिया और पैरामिलिट्री बल भी युद्ध के मैदान में उतरेंगे।

सैन्य आंकड़ों की बात करें तो इस वक्त क्यूबा के पास लगभग 50000 सक्रिय सैनिक हैं। इसके अलावा, उनके पास 39000 रिजर्व सैनिक और लगभग 90000 पैरामिलिट्री सदस्य मौजूद हैं। क्यूबा की सरकार ने अपनी सेना को ईरान की तर्ज पर अलग-अलग स्वतंत्र इकाइयों में बांट रखा है। युद्ध की स्थिति में सेना की ये टुकड़ियां खुद फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं, जिससे उनके कमांड स्ट्रक्चर को तोड़ना मुश्किल हो जाता है और क्यूबा को गुरिल्ला लड़ाई में भी माहिर माना जाता है, और 1970 के दशक में इसी युद्ध कौशल के दम पर उन्होंने अमेरिका के सामने कड़ी चुनौती पेश की थी।