वेनेजुएला पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बंधक बनाया गया है, ने 3 जनवरी 2026 को वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम पर दुनिया भर से तीखी और विविध प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और बल प्रयोग के संबंध में विभिन्न देशों के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का बयान
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर एक जटिल और सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है और उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे 'जायज रक्षा' बताया। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का मानना है कि सत्तावादी शासनों को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य कार्रवाई का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए और हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अपनी सुरक्षा पर 'हाइब्रिड हमलों' के खिलाफ रक्षात्मक हस्तक्षेप को जायज ठहराया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से उन सरकारी संस्थाओं का उल्लेख किया जो ड्रग तस्करी को बढ़ावा देती हैं, यह सुझाव देते हुए कि अमेरिकी कार्रवाई ऐसे संदर्भ में उचित हो सकती है और यह बयान एक तरफ संप्रभुता के सम्मान की बात करता है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कुछ प्रकार के हस्तक्षेपों को स्वीकार करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नई बहस छिड़ गई है।
रूस की कड़ी प्रतिक्रिया
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की स्थिति को लेकर एक सीधा और दृढ़ रुख अपनाया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि जब तक वेनेजुएला के हालात ठीक नहीं हो जाते, तब तक देश का प्रशासन अमेरिका ही संभालेगा। इस उद्देश्य के लिए, उन्होंने एक विशेष टीम के गठन की भी जानकारी दी है। इस टीम में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेग और अन्य शीर्ष अधिकारी शामिल हैं और यह घोषणा वेनेजुएला की संप्रभुता पर एक बड़ा प्रभाव डालती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप है। अमेरिकी प्रशासन का यह कदम वेनेजुएला के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा करता है और क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है।
वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद रूस ने तत्काल और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई को 'सशस्त्र आक्रमण' करार दिया है, जिसे 'बेहद चिंताजनक और निंदनीय' बताया गया है। रूस ने अमेरिका से अपनी कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और वेनेजुएला के वैध रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने का आग्रह किया है। रूसी मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी मुद्दे का समाधान। केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए, न कि बल प्रयोग से। यह बयान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग के खिलाफ रूस के पारंपरिक रुख को दर्शाता है और वेनेजुएला की संप्रभुता के लिए उसके समर्थन को रेखांकित करता है। रूस ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा बताया है।
चीन का स्पष्ट विरोध
चीन ने भी वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को 'अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन', 'वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला' और 'क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा' बताया है। चीन ने अमेरिकी कार्रवाई को 'दादागिरी' और 'Hegemonic Behaviour' (आधिपत्यवादी व्यवहार) करार दिया है। चीन ने अमेरिका से संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने और बल प्रयोग बंद करने की मांग की है। चीन का यह रुख अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, और वह हमेशा से एकतरफा सैन्य हस्तक्षेपों का विरोधी रहा है और चीन ने इस घटना को वैश्विक व्यवस्था के लिए एक खतरनाक मिसाल के रूप में देखा है, जो छोटे और विकासशील देशों की संप्रभुता को कमजोर कर सकती है। यह घटना अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में एक और मुद्दा जोड़ सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर प्रभाव
वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके बाद की वैश्विक प्रतिक्रियाएं अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और भू-राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं और इटली का संतुलित लेकिन रक्षात्मक रुख, अमेरिका का सीधा हस्तक्षेप, और रूस व चीन की कड़ी निंदा, सभी इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में संप्रभुता, हस्तक्षेप और बल प्रयोग की वैधता को लेकर कितनी भिन्न राय हैं। निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाए जाने की घटना ने वेनेजुएला के आंतरिक संकट। को एक अंतर्राष्ट्रीय आयाम दे दिया है, जिससे वैश्विक शक्तियों के बीच तनाव और बढ़ गया है। इस स्थिति का समाधान कैसे होता है, यह भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका के लिए महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।