लाइफ / विटामिन डी हर दिन खाएंगे तभी रह पाएंगे सकुशल स्वस्थ्य

News18 : Jan 06, 2020, 03:36 PM

भारत में 70 से 90 फीसदी लोगों के शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) की कमी है। यह आंकड़ा निश्चित तौर पर चौंकाने वाला है। लेकिन समझदार वही है जो समस्या की न सिर्फ पहचान करे बल्कि उससे निपटने और उसे सुलझा लेने की दिशा में काम करना शुरू कर दे। विटामिन डी को लेकर आपके सभी छोटे-बड़े सवालों के जवाब, आइए, आज हम आपको अपने इस लेख में दें। हम आपको जो जानकारी देने जा रहे हैं, उन पर पूरी तरह से अमल करने से पहले आपको यथासंभव डॉक्टरी परामर्श ले लेना चाहिए। क्योंकि, प्रत्येक व्यक्ति की इससे जुड़ी कमी, जरूरत और संबंधित क्षमताएं अलग-अलग होती हैं।

आखिर है क्या विटामिन डी

बीबीसी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, विटामिन डी का नाम भले ही 'विटामिन' है लेकिन यह विटामिन नहीं बल्कि हार्मोन है। अब आपको यह भी बताते चलते हैं कि विटामिन डी दो प्रकार का होता है। जिस कमी की हम बात कर रहे हैं वह विटामिन डी 3 (Vitamin D3) है। इसके अलावा विटामिन डी 2 (Vitamin D2) होता है लेकिन शरीर इसे पचा नहीं कर पाता। एक ऐसा हार्मोन जो शरीर को कैल्शियम को पचाने में मदद करता है वह है विटामिन डी3। जब हमारे शरीर पर सूरज की किरणें पड़ती हैं तब सूरज की अल्ट्रावॉयलेट-बी किरणें हमारे शरीर पर पड़ती हैं तो हमारा शरीर भीतर ही मौजूद कोलेस्ट्रॉल से विटामिन डी बना लेता है। हाल ही में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2050 तक दुनिया में जितने भी कूल्हे फ्रैक्चर होंगे, उनमें से आधे तो एशिया में ही होंगे।

विटामिन डी आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों।।

• अब भले ही यह सीधे सीधे विटामिन की श्रेणी में न आता हो लेकिन इसे ऐसे समझिए कि यह एक प्रकार का योद्धा है जिसके बारे में दावा किया जाता है कि विटामिन डी से हमारी रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। रोग होने पर रोग को ठीक करने के लिए किसी ऐसे योद्धा की कितनी जरूरत होगी, यह हमें समझाने की जरूरत नहीं है। कुल मिलाकर यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाता है।

• नसों यानी तंत्रिका तंत्र (नर्व्स) और मांसपेशियों यानी मसल्स के को-ऑर्डिनेशन को सही तरही से नियंत्रित करता है। न सिर्फ हड्डियों बल्कि मसल्स और लिगामेंट्स को मजबूत बनाता है।

• बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में हुए एक रिसर्च में पाया गया कि विटामिन डी से हमारी सांस की नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाव होता है।• यह हमारे शरीर की कोशिकाओं में प्रोटीन की मात्रा को नियमित करता है। वहीं आंतों में कैल्शियम की तादाद भी विटामिन डी के चलते उचित मात्रा में रहती है जिससे आंतों का कैंसर होने की आशंका कम हो जाती है।

• कई प्रकार के कैंसर, जैसे कि लीवर कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर पर हुई रिसर्च बताती हैं कि विटामिन डी कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।

मानसिक रोग जैसे कि ड्रिपेशन में सहायक?

जानकार मानते हैं कि विटामिन डी मानसिक रोगों से लड़ने में मदद करता है। दरअसल हमें सूरज की रोशनी से एक पिगमेंट सेरोटिनिन प्राप्त होता है। इस पिगमेंट का संबंध हमारे मूड से होता है। वहीं, पिगमेंट मेलाटोनिन भी हमें विटामिन डी से हासिल होता है। ऐसे में यदि इन दोनों पिगमेंट की कमी होती है तो इससे मानसिक रोगों जैसे डिप्रेशन की आशंका बढ़ जाती है।

कैसे प्राप्त करें विटामिन डी3

• धूप से। जी हां, धूप से ही आपको सर्वाधिक और सर्वोचित विटामिन डी3 मिलता है। हालांकि इसके अलावा, एनिमल फैट मसलन, फिश ऑयल, लिवर, एग यॉक, दूध से बने प्रॉडक्ट्स आदि से भी यह मिलता बताया जाता है।

• धूप सेंकने के सही समय और तरीके को लेकर अक्सर अलग-अलग राय सुनने को मिलती है। दरअसल, इस बाबत अधिक कंफ्यूजन की जरूरत नहीं है। यह ऐसे समझें- धूप में यदि आपकी परछाई आपकी हाइट से छोटी बन रही हो, तब धूप सेंकनी अधिक फायदेमंद है।

• सीधे स्किन पर धूप पड़े। यानी, जब भी धूप सेकने जाएं तो कोशिश करें कि चेहरा, गर्दन, कंधा, छाती, पीठ खुली हो। यहां से धूप शरीर में प्रवेश करेगी। गौरतलब है कि शीशे से छनकर आनेवाली धूप से न के बराबर ही विटमिन डी का निर्माण हो पाता है।

• यदि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे आप धूप सेंक सकते हैं तो जरूर ऐसा करें। एक दिन की विटामिन की डोज के लिए आपको 45 मिनट धूप सेंकनी होगी। यदि इससे ज्यादा देर बैठेंगे तो ऐसा नहीं है कि ज्यादा विटामिन सोख लेंगे। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे कम बैठने पर कुछ मात्रा में विटामिन बनता तो है लेकिन शरीर उसे पचा नहीं पाएगा और वह वेस्ट हो जाएगा।