Punjab Election / पंजाब में बदलेगी सत्ता या कांग्रेस करेगी वापसी? चारों खेमों के बीच कांटे की टक्कर

Zoom News : Feb 20, 2022, 07:45 PM
पंजाब में बदलाव की बात ज्यादातर लोगों के जुबान पर है. लोगों का मानना है कि हमने कांग्रेस और अकाली दोनों को आजमा कर देख लिया है. लेकिन, हमारी समस्या का समाधान नहीं निकला. इसीलिए इस बार आम आदमी पार्टी को आजमाना चाहते हैं. चौक चौराहा हो या पोलिंग बूथ के आसपास खड़े लोगों में आम आदमी पार्टी को लेकर रुझान साफ देखा गया.

आम आदमी पार्टी का पलड़ा भारी

हालांकि पंजाब में सरकार किसकी बनेगी इस बात को लेकर दो तरह की चर्चा है. पहला ये कि या तो आम आदमी पार्टी की सरकार बहुमत से बनेगी या फिर त्रिशंकु विधान सभा होगी. लेकिन त्रिशंकु वाले हालात में भी आम आदमी पार्टी ही सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आएगी.

चन्नी से कांग्रेस को मिली ताकत

जहां तक कांग्रेस का सवाल है, तो ये कहा जा रहा है कि वो दूसरे नंबर पर रहेगी. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि मुख्यमंत्री चन्नी के दो सीटों में से एक पर हार की चर्चा और पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिद्धू की खुद की सीट के फंसे होने की बात. वैसे लोग ये जरूर मानते हैं कि अगर कैप्टन के नेतृत्व में चुनाव होता तो कांग्रेस तीसरे नंबर पर चली जाती. चन्नी ने कम समय में यानि करीब 100 दिन में पार्टी को लड़ाई में लाकर खड़ा कर दिया है.

केजरीवाल को इस मुद्दे से हो सकता है नुकसान

हालांकि, खालिस्तान मामले से केजरीवाल को जोड़ने वाली बात का नुकसान आम आदमी पार्टी को हुआ है, लेकिन पिछले बार की तुलना में कम. क्योंकि ये मामला इस बार काफी देर से उठाया गया. 2017 के चुनाव में मतदान से करीब 20 दिन पहले भटिंडा ब्लास्ट और केजरीवाल के खालिस्तानी के घर रुकने का मामला आया था. तबतक केजरीवाल के बारे में लोगों को कम जानकारी थी और विरोधी दलों को उनके खिलाफ प्रचार का समय भी मिल गया था. लोगों से बातचीत में इस मुद्दे का असर कम दिखा है.

बाबा राम रहीम का पड़ सकता है बड़ा फर्क

आम आदमी पार्टी को बाबा राम रहीम के बीजेपी और अकाली के पक्ष में वोट करने की अपील का नुकसान भी होता दिख रहा है. क्योंकि राम रहीम के समर्थकों में बड़ी तादाद में आम आदमी पार्टी को वोट देने वाले थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. क्षेत्र के हिसाब से देखें तो पंजाब 3 रीजन में बंटा हुआ है. पहला मालवा जिसमें 69 सीट हैं, दूसरा मांझा 25 और तीसरा द्वाबा 23 रीजन है.

वरना पंजाब त्रिशंकु विधान सभा की तरफ

आम आदमी पार्टी ने मालवा रीजन में पिछली बार भी अच्छा प्रदर्शन किया था. उसे 20 में से ज्यादातर सीटें इसी रीजन से मिली थी. इस रीजन में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन पर ही सरकार बनाने का समीकरण निर्भर करेगा. साथ ही अगर आम आदमी पार्टी मांझा और द्वाबा रीजन में घुसने में कामयाब होती है तो उसकी सरकार तय है. वरना पंजाब त्रिशंकु विधान सभा की तरफ़ जाएगा.

1967 और 1969 के चुनाव को छोड़ दें तो..

लोगों में त्रिशंकु विधान सभा का भी डर है, क्योंकि किसान आंदोलन के बाद मोदी और बीजेपी से नाराज वोटर किसी भी कीमत पर राष्ट्रपति शासन के जरिए पंजाब में मोदी का राज नहीं देखना चाहते हैं. वैसे भी पंजाब में हमेशा बहुमत की ही सरकार बनी है... 1967 और 1969 के चुनाव को छोड़ दें तो.

करीब 35 फीसदी दलित मतदाता

जातीय समीकरण की बात करें तो यहां करीब 35 फीसदी दलित मतदाता हैं. चरणजीत चन्नी के दलित होने की वजह से कांग्रेस को इस वोट बैंक में सबसे ज्यादा फायदा होने के आसार हैं, दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी भी इसी वोट बैंक के सहारे सत्ता में आने का दावा कर रही है. दलित वोट बैंक में 60 % कांग्रेस तो 40 % आम आदमी पार्टी के साथ जाने के आसार हैं.

20 % जट सिख मतदाता

दूसरे नंबर पर 20 % जट सिख मतदाता हैं. जिनमें से आम आदमी पार्टी, अकाली दल और कांग्रेस में अलग-अलग इलाके और उम्मीदवार के हिसाब से जाएंगे. माना जा रहा है जट सिख वोटरों की पहली पसंद आम आदमी पार्टी है, इसकी वजह है भगवंत मान का CM चेहरा होना. दूसरे नंबर पर अकाली होंगे और तीसरे पर कांग्रेस.

हिंदू वोटरों की तादाद भी ठीक ठाक

इसके अलावा हिंदू वोटरों की तादाद भी ठीक ठाक है. इसमें सबसे ज्यादा बीजपी गठबंधन को फायदा होगा. आम आदमी पार्टी भी इसमें सेंध लगा रही है, लेकिन केजरीवाल के खालिस्तान से जुड़े होने की खबर के बाद हिंदू वोटरों का मूड बदला है ऐसा कहा जा रहा है. क्योंकि पंजाब में अशांति का सबसे ज्यादा खामियाजा उन्हीं को भुगतना पड़ सकता है.

आप की सरकार या फिर त्रिशंकु सरकार?

आखिर में आज पंजाब के मतदान और मतदाता के रुख को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि अबकी बारी पंजाब में या तो आप की सरकार या फिर त्रिशंकु सरकार. कांग्रेस सरकार के रिपीट होने के आसार न के बराबर हैं.

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