मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि यमुना का जल शेखावाटी के उज्ज्वल भविष्य की एक मजबूत नींव बनेगा और सोमवार, 20 जुलाई को जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में शेखावाटी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक भव्य अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस परियोजना से सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिले विकास, विरासत और विश्वास के एक नए मॉडल के रूप में उभरेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार का संकल्प और समर्पण ही शेखावाटी के समग्र विकास की आधारशिला बन रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों का तीन दशक लंबा इंतजार अब समाप्त हो गया है।
ऐतिहासिक यमुना जल समझौता और तकनीकी विवरण
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यमुना जल समझौते को शेखावाटी की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण ही 30 साल पुराना यह लंबित मुद्दा धरातल पर उतर सका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसके माध्यम से 1917 क्यूसेक यमुना जल शेखावाटी के अंचल तक पहुंचेगा। इस योजना से सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों के करीब 75 लाख लोगों को पानी की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 1994 में यमुना जल बंटवारे का समझौता होने के बावजूद राजस्थान को उसके हक का पानी नहीं मिल पा रहा था, लेकिन वर्तमान सरकार ने संवाद और समन्वय की नीति अपनाकर महज ढाई वर्षों में इस प्रक्रिया को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है।
विरासत का संरक्षण और पर्यटन विकास की योजना
जल सुरक्षा के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने शेखावाटी की सांस्कृतिक पहचान को संजोने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि शेखावाटी अपनी भव्य हवेलियों, विश्वप्रसिद्ध भित्ति चित्रों और अद्वितीय स्थापत्य कला के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। राज्य सरकार ने शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना के तहत सीकर, झुंझुनूं और चूरू की 662 ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण और वहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। सरकार का लक्ष्य इन हवेलियों के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे का विस्तार
क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए मुख्यमंत्री ने सड़क नेटवर्क के विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और बीकानेर-कोटपूतली एक्सप्रेस-वे के निर्माण से शेखावाटी क्षेत्र की दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी राजस्थान के साथ कनेक्टिविटी काफी बेहतर हो जाएगी। इससे परिवहन, उद्योग, कृषि और पर्यटन के क्षेत्रों को नए आयाम मिलेंगे। सरकार केवल जल ही नहीं, बल्कि ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधुनिक कृषि तकनीकों पर भी योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है ताकि शेखावाटी का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
वीरता, उद्यमिता और आस्था का संगम है शेखावाटी
मुख्यमंत्री ने शेखावाटी को वीरों, संतों, शहीदों और भामाशाहों की पवित्र भूमि बताया। उन्होंने कहा कि यहां के जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कठिन अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया है और साथ ही, इस क्षेत्र के उद्यमियों ने देश के बड़े व्यापारिक घरानों की स्थापना कर भारत के आर्थिक विकास में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, जीण माता, शाकंभरी माता, हर्षनाथ, लोहार्गल, नवलगढ़, मंडावा और डूंडलोद जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का विशेष उल्लेख करते हुए इन्हें शेखावाटी की सांस्कृतिक पहचान का मुख्य केंद्र बताया।
समारोह के मुख्य अंश और गणमान्य अतिथि
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, जहां मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से यमुना जल से भरा एक कलश शेखावाटी अंचल को समर्पित किया और इस दौरान विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में मंगलगीत गाकर उनका स्वागत किया। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दशकों पुरानी समस्या का समाधान हुआ है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने इसे पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत को सच्ची श्रद्धांजलि बताया। शेखावाटी फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद कुमार गोयल ने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की और कार्यक्रम में सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर, विधायक कालीचरण सराफ, गोरधन वर्मा, हरलाल सहारण, राजेंद्र भांबू, सुभाष मील, गोपाल शर्मा, धर्मपाल गुर्जर और विक्रम सिंह जाखल सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
