भारत-यूरोपीय संघ एफटीए: यूरोप में भारतीय कारों का जलवा, 2 लाख 50 हजार गाड़ियों पर 8 प्रतिशत ड्यूटी की बड़ी डील

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते के ड्राफ्ट से भारतीय ऑटोमोबाइल और कृषि क्षेत्र के लिए यूरोप के दरवाजे खुल गए हैं, जिससे निर्यात में भारी वृद्धि की संभावना है।

भारतीय ऑटोमोबाइल निर्यात के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने वाला है क्योंकि यूरोपीय बाजार अब भारतीय निर्मित वाहनों के लिए पूरी तरह से तैयार हो रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का विस्तृत ड्राफ्ट अब सामने आ गया है। इस समझौते के लागू होने के बाद हर साल लाखों की संख्या में मेड इन इंडिया गाड़ियां यूरोप की सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी। इस महत्वपूर्ण समझौते पर इसी साल 27 जनवरी को दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक इस पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएंगे और अगले साल से यह डील पूरी तरह से प्रभावी हो सकती है।

रियायती ड्यूटी और कोटे का पूरा गणित

यूरोपीय संघ द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार हर साल 2 लाख 50 हजार भारतीय कारों को उनके बाजार में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। समझौते के शुरुआती चरण में इन कारों पर केवल 8 प्रतिशत की इंपोर्ट ड्यूटी यानी आयात शुल्क लगेगा। यह विशेष छूट उन पेट्रोल और डीजल (आईसीई) वाहनों के साथ-साथ हाइब्रिड कारों पर भी लागू होगी जिनकी कीमत 50,000 यूरो (सीआईएफ) तक है। यहां सीआईएफ का अर्थ है कि इसमें कार की वास्तविक कीमत के साथ शिपिंग का खर्च और बीमा की राशि भी शामिल होती है।

इस डील के तहत ड्यूटी में कटौती का एक चरणबद्ध तरीका अपनाया गया है। समझौते के लागू होने के दूसरे साल में यह ड्यूटी घटकर 6 प्रतिशत रह जाएगी। तीसरे साल में इसे और कम करके 4 प्रतिशत कर दिया जाएगा। चौथे साल में यह शुल्क मात्र 2 प्रतिशत होगा और पांचवें साल में पहुंचते ही इन गाड़ियों पर टैक्स पूरी तरह से शून्य यानी 0 प्रतिशत हो जाएगा। इसके अलावा 10वें साल तक भारतीय कारों के इस सालाना कोटे को बढ़ाकर 4 लाख यूनिट कर दिया जाएगा। यदि भारत से होने वाला निर्यात इस निर्धारित कोटे से अधिक होता है तो अतिरिक्त गाड़ियों पर मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) के नियमों के तहत सामान्य टैक्स चुकाना होगा।

लग्जरी और महंगी गाड़ियों के लिए विशेष प्रावधान

समझौते में उन गाड़ियों के लिए भी नियम स्पष्ट किए गए हैं जिनकी कीमत 50,000 यूरो से अधिक है। ऐसी महंगी और लग्जरी गाड़ियों पर कोटे वाली शुरुआती छूट तो नहीं मिलेगी लेकिन उनके लिए एक लंबी अवधि की राहत योजना बनाई गई है। पहले साल में इन महंगी कारों पर भी 8 प्रतिशत की ड्यूटी लगेगी। इसके बाद धीरे-धीरे कटौती करते हुए 10वें साल में जाकर इन पर लगने वाला टैक्स पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा। इससे यह स्पष्ट है कि भविष्य में महंगी भारतीय गाड़ियों के लिए भी यूरोपीय बाजार का रास्ता काफी सुगम होने वाला है।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए नई व्यवस्था

पर्यावरण अनुकूल वाहनों को बढ़ावा देने के लिए यूरोपीय संघ ने बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (बीईवी) और प्लग इन हाइब्रिड (पीएचईवी) के लिए एक अलग कोटा सिस्टम तैयार किया है और 40,000 यूरो तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर समझौते के 5वें साल से छूट मिलनी शुरू होगी। उस समय 8 प्रतिशत ड्यूटी के साथ 27,500 गाड़ियों को यूरोप में प्रवेश मिलेगा। 14वें साल तक इस कोटे को बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार गाड़ियों तक ले जाया जाएगा। वहीं 40,000 यूरो से 60,000 यूरो की श्रेणी वाली ईवी के लिए 5वें साल में 16,250 गाड़ियों का कोटा तय किया गया है। 60,000 यूरो से अधिक कीमत वाली प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों के लिए 5वें साल में 6,250 गाड़ियों का कोटा रखा गया है। 9वें साल से इन सभी श्रेणियों पर से ड्यूटी पूरी तरह हटा ली जाएगी।

कृषि और डेयरी उत्पादों को मिला बड़ा बाजार

यह व्यापार समझौता केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा लाभ भारतीय किसानों और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को भी मिलेगा। समझौते के ड्राफ्ट में भारतीय अंगूर, सूखे प्याज, खीरे, गुड़ से बनी रम और घी जैसे कृषि उत्पादों पर भी बड़ी रियायतें दी गई हैं। विशेष रूप से घी के निर्यात के लिए यूरोपीय संघ ने हर साल 1,000 मीट्रिक टन का कोटा निर्धारित किया है। इस कोटे के अंतर्गत भारतीय निर्यातकों को कस्टम ड्यूटी के बेस रेट पर 50 प्रतिशत तक की बड़ी छूट दी जाएगी। इससे यूरोप में भारतीय डेयरी उत्पादों की मांग में तेजी आने की उम्मीद है। इस समझौते के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद भारत का विदेशी व्यापार एक नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।