लॉकडाउन में कड़क थाली / प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के कारण लॉकडाउन के ढाई महीने में बिके 14 गुना कड़कनाथ मुर्गे

Zoom News : Jun 29, 2020, 08:56 AM

ग्वालियर  कोरोना संक्रमण की वजह से हुए लॉकडाउन के दाैरान सबसे अधिक चिकन यदि खाया गया ताे वह है कड़कनाथ चिकन। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र और इससे जुड़े मुर्गी पालकों ने महज ढाई महीने में 5600 कड़कनाथ मुर्गे बेचे। जबकि लॉकडाउन से पहले इतने ही वक्त में महज 400 मुर्गे ही बिके थे। तीन साल पहले जिले में कड़कनाथ मुर्गाें की ब्रीडिंग शुरू हुई थी। कृषि विज्ञान केंद्र से मुर्गों और चूजों को पालकों को दिया गया था। लाॅकडाउन से पहले कड़कनाथ की बिक्री सामान्य थी लेकिन जब से अफवाह उड़ी कि सामान्य मुर्गे संक्रमित हाे सकते हैं ताे इनकी बिक्री में उछाल आ गया। 

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकाें के मुताबिक कड़कनाथ औषधीय गुणों से युक्त होता है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा हाेती है। इस वजह से यह संक्रमित नहीं होता है और लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से 90 मुर्गी पालक जुड़े हुए हैं जो कड़कनाथ मुर्गों का पालन करते हैं और उन्हें बेचते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र से भी इनकी बिक्री की जाती है।

ये मुर्गे औषधीयगुणों वाले माने जाते हैं
कड़कनाथ में अन्य नस्ल के मुर्गाें की तुलना में प्रोटीन ज्यादा होता है। इसमें वसा 0.73 से 1.05 प्रतिशत तक होता है, जबकि अन्य नस्लों में 13 से 25 प्रतिशत तक पाया जाता है। वसा कम होने से कोलेस्ट्रॉल भी कम पाया जाता है। साथ ही कड़कनाथ के मांस में विभिन्न प्रकार के अमीनो एसिड अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। विटामिन बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी व ई भी अन्य नस्लों की तुलना में अधिक मात्रा में होते हैं। इससे कड़कनाथ मुर्गे को औषधीयगुणों वाला माना जाता है।

कड़कनाथ मुर्गाें के लिए सिफारिशें भी आई थीं
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक तथा प्रमुख डॉ. राजसिंह का कहना है कि लॉकडाउन में अचानक कड़कनाथ की बिक्री में उछाल आया है। इसकी वजह ब्रॉयलर के मुर्गों के बारे में उड़ी अफवाह तथा कड़कनाथ के औषधीय गुण हैं। केंद्र से जुड़े मुर्गी पालक और केंद्र ने इस दौरान 5600 कड़कनाथ मुर्गों की बिक्री की। जबकि इससे पहले के ढाई महीने में 400-500 मुर्गे ही बेचे थे। इस दौरान कड़कनाथ की उपलब्धता को लेकर सिफारिशें में भी आईं थीं।
वसा कम व प्रोटीन ज्यादा होने से फायदेमंद है
कड़कनाथ में वसा कम होता है जबकि प्रोटीन की मात्रा अन्य प्रजाति के मुर्गों की अपेक्षा ज्यादा होती है। वसा कम होने और प्रोटीन ज्यादा होने से ही यह फायदेमंद होता है। प्रोटीन के कारण में ही इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है।
-डॉ. संजय धवले, प्रोफेसर, जीआरएमसी

Booking.com

SUBSCRIBE TO OUR NEWSLETTER