तमिलनाडु की राजनीति और राष्ट्रीय राजधानी के राजनीतिक गलियारों में एक बड़ी हलचल पैदा करते हुए, तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी से अपना आधिकारिक इस्तीफा दे दिया है। यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम मंगलवार सुबह, 2 जून को सामने आया, जब अन्नामलाई ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा पत्र सौंपा। पिछले कई महीनों से अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं, जो अब उनके इस कदम से सच साबित हुई हैं।
राष्ट्रीय राजधानी में उच्च स्तरीय बैठकें
नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद, के. अन्नामलाई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की और अमित शाह के साथ उनकी इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। बता दें कि बीते कई महीनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि अन्नामलाई का भाजपा से मोहभंग हो गया है और वह जल्द ही पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। उनके इस्तीफे और उसके बाद गृह मंत्री से हुई मुलाकात ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
नई राजनीतिक पार्टी के गठन की अटकलें
अन्नामलाई के इस्तीफे के साथ ही उनके द्वारा एक नई राजनीतिक पार्टी के ऐलान की संभावनाएं भी प्रबल हो गई हैं। तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में इस संबंध में पोस्टर भी देखे गए हैं, जो उनके नए राजनीतिक सफर की ओर इशारा कर रहे हैं। दिल्ली रवाना होने से पहले सोमवार को चेन्नई एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए अन्नामलाई ने कहा था कि वह आगामी 2 दिन में अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर देंगे। उनके इस बयान ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह कोई बड़ा फैसला लेने वाले हैं।
नीतिगत विरोध और त्रि-भाषा फॉर्मूला
अन्नामलाई और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेदों का एक प्रमुख कारण नीतिगत फैसले भी रहे हैं। हाल ही में अन्नामलाई ने सीबीएसई द्वारा मौजूदा शैक्षणिक वर्ष से 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति लागू करने की घोषणा का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने इस अधिसूचना को वापस लेने की मांग की थी और उनके इस रुख को केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़े विद्रोह के रूप में देखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई अपनी खुद की राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए केंद्र सरकार के कुछ फैसलों का विरोध कर रहे थे।
आंतरिक कलह और 2026 चुनाव की रणनीति
पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान टीटीवी दिनाकरन और पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम को भाजपा गठबंधन में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, बाद में पार्टी आलाकमान ने अन्नामलाई के स्थान पर नैनार नागेंद्रन को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया, जिससे उनके और पार्टी के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ चुनावी गठबंधन होने के बाद से अन्नामलाई ने भाजपा से दूरी बना ली थी। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन के प्रबंधन, उम्मीदवारों के चयन और सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टी नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी, जो अंततः उनके इस्तीफे का कारण बनी।
