Tech / Apple के इस फीचर ने कराया Facebook का 10 अरब डॉलर का नुकसान, जानिए कैसे

Zoom News : Feb 03, 2022, 04:53 PM
नई दिल्ली. स्मार्टफोन्स और सोशल मीडिया, आज के समय के दो ऐसे मार्केट्स हैं जिनसे कोई भी अनजान नहीं है. फेसबुक, वॉट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने यह जानकारी दी है कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक को ऐप्पल की वजह से 10 अरब डॉलर का नुकसान सहन पड़ेगा. आइए इस मामले के बारे में डिटेल में जानते हैं..

फेसबुक को ऐपल की वजह से झेलना पड़ा नुकसान

बुधवार यानी 2 फरवरी, 2022 को फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा ने यह जानकारी दी है कि ऐप्पल के प्राइवसी चेंज कर कारण उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ा है. मेटा का यह कहना है कि iOS के प्राइवसी बदलाव के चलते फेसबुक की कंपनी को 10 अरब डॉलर का घाटा हो सकता है. मेटा के सीएफओ डेव वेहनर का यह कहना है कि इस साल उनकी कंपनी के बिजनेस पर iOS का काफी उलट असर होगा.

कंपनी का साथ हुआ ऐसा

मेटा के सीएफओ कहते हैं कि उनकी कंपनी ने 10 अरब डॉलर नुकसान का अनुमान लगाया है और इस जानकारी को जारी करने के बाद मेटा के शेयर्स में 23% तक की गिरवाट देखी गई. इस नुकसान का जिम्मेदार ऐप्पल के ऐप ट्रैकिंग ट्रांस्पेरेंसी फीचर को ठहराया जा रहा है जिसका ऐड इंडस्ट्री पर काफी असर हुआ है.   

ऐप्पल का ऐप ट्रैकिंग ट्रांस्पेरेंसी फीचर

अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर ऐप्पल का यह ऐप ट्रैकिंग ट्रांस्पेरेंसी फीचर क्या है तो हम आपको बता दें कि ऐप्पल का यह फीचर उसके यूजर्स को उनके डेटा पर ज्यादा कंट्रोल देता है. इस फीचर को सबसे पहले पिछले साल लॉन्च हुए iOS 14.5 करजन में जारी किया गया और अब यह फीचर iOS 15 में भी मौजूद है. आपको बता दें कि करीब 72% मॉडर्न iPhones इस फीचर पर काम करते हैं.

कैसे काम करता है यह फीचर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐप्पल का यह फीचर इस्तेमाल करके iPhone यूजर्स किसी भी ऐप पर आने वाले ऑनलाइन ऐड्स से छुटकारा पा सकते हैं. इस फेआउतरे के चलते अगर आप अपने iPhone पर कोई भी ऐप खोलते हैं तो आकपी स्क्रीन पर एक पॉप-अप आएगा जिसमें यह पूछा जाएगा कि आप ऐप को ट्रैक करने की आजादी देते हैं या नहीं. अगर आप नहीं को चुनते हैं तो ऐप डिवेलपर्स IDFA एक्सेस नहीं कर पाएंगे और ऑनलाइन ऐड्स डिस्प्ले नहीं कर पाएंगे.

ऐपल के इस फीचर से ऐड इंडस्ट्री काफी नाराज है, कई ऑनलाइन ऐड्वर्टाइजिंग कंपनियों ने इसका विरोध किया और फेसबुक ने इस फीचर के खिलाफ एक मार्केटिंग कैम्पैन भी चलाया था जिसमें कंपनी ने यह कहा था कि ये बदलाव प्राइवसी नहीं बल्कि प्रॉफिट के लिए किया जा रहा है.

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