पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है जिसने न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लाहौर में एक निजी समारोह के दौरान उन्होंने दावा किया कि जिस मकसद के लिए पाकिस्तान का निर्माण हुआ था, वह अब पूरा होने के करीब है। मुनीर के इस बयान को उनकी कट्टरपंथी विचारधारा और पाकिस्तान की। सेना के बदलते स्वरूप के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की नींव इस्लाम पर टिकी है और भविष्य में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।
लाहौर के शाही समारोह में बड़ी बात
जनरल आसिम मुनीर पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नाती जुनैद सफदर के वलीमा समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में नवाज शरीफ, मरियम नवाज और देश के तमाम बड़े नेता और सैन्य अधिकारी मौजूद थे और इसी दौरान मीडिया से बात करते हुए मुनीर ने कहा कि अल्लाह ने पाकिस्तान को एक ऐतिहासिक अवसर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान का निर्माण इस्लाम के नाम पर हुआ था और आज यह देश इस्लामी जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। उनके अनुसार, आने वाले समय में पाकिस्तान की अहमियत और भी बढ़ने। वाली है और देश तेजी से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है।
पुराने सेना प्रमुखों से अलग है मुनीर का अंदाज
आसिम मुनीर को पाकिस्तान के पिछले सेना प्रमुखों से काफी अलग माना जाता है। जहां पुराने जनरल अक्सर पश्चिमी देशों में प्रशिक्षित होते थे और धर्म को राजनीति से अलग रखने की कोशिश करते थे, वहीं मुनीर एक हाफिज-ए-कुरान हैं। उनकी सार्वजनिक छवि में मजहब का बहुत बड़ा स्थान है। वह पाकिस्तान के इतिहास के पहले ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस और आईएसआई दोनों का नेतृत्व किया है। उनकी कमान में पाकिस्तानी सेना खुद को केवल सरहदों का। रक्षक नहीं, बल्कि इस्लाम का रक्षक भी बता रही है। इसके लिए सेना अब पुराने इस्लामिक और अरबी प्रतीकों का खुलकर इस्तेमाल कर रही है।
सबसे ताकतवर पद और परमाणु हथियारों की कमान
4 दिसंबर 2025 को आसिम मुनीर को पाकिस्तान का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त किया गया। इसके साथ ही वह सेना प्रमुख (COAS) के पद पर भी बने हुए हैं। यह पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार है जब कोई अधिकारी इन दोनों शक्तिशाली पदों को एक साथ संभाल रहा है। 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद उन्हें यह नई शक्तियां मिली हैं, जिससे अब पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण भी सीधे उनके हाथों में आ गया है। इस बदलाव ने उन्हें पाकिस्तान का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बना दिया है, जिसकी ताकत प्रधानमंत्री से भी कहीं अधिक मानी जा रही है।
आर्थिक सुधार और अंतरराष्ट्रीय संबंध
मुनीर ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और दुनिया में उसकी साख बढ़ी है। उनके इस बयान को हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। के साथ हुई उनकी मुलाकातों से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मुनीर और शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को पाकिस्तान। के खनिज संसाधनों और कच्चे तेल के भंडारों का भरोसा दिलाया है। हालांकि, इन संसाधनों की वास्तविकता को लेकर अभी भी कई सवाल खड़े हैं, लेकिन मुनीर इसे पाकिस्तान की नई पहचान के तौर पर पेश कर रहे हैं।जनरल मुनीर लगातार टू नेशन थ्योरी यानी द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने पूर्व में भी कहा है कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच बुनियादी अंतर है और वे दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। वह अपनी विचारधारा में भारत के प्रति कड़ा रुख रखते हैं और अक्सर अपने भाषणों में इस्लामिक विचारधारा को सर्वोपरि बताते हैं और बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय विद्रोहियों को वह फितना अल-खवारिज जैसे धार्मिक नाम देकर उन्हें गुमराह और भारत समर्थक करार देते हैं। उनका मानना है कि पाकिस्तान की नींव कलमा पर टिकी है और इस सोच को अगली पीढ़ियों तक ले जाना सेना की जिम्मेदारी है।