Bihar Elections 2025 / PM मोदी और CM नीतीश के अलग प्रचार पर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, बताया 'योजना का हिस्सा'

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बिहार चुनाव में PM मोदी और CM नीतीश के अलग-अलग प्रचार पर कहा कि यह उनकी योजना का हिस्सा है। उन्होंने नीतीश कुमार को परिपक्व नेता बताया और तेजस्वी यादव के नौकरी के वादे को अव्यावहारिक करार दिया। प्रधान ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और NDA की एकजुटता पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक साथ मंच साझा न करने के सवाल पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया, जिससे एनडीए। गठबंधन की चुनावी तैयारियों और एकजुटता पर प्रकाश डाला गया। प्रधान ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी, जिसमें गठबंधन की स्थिरता, युवा और महिला मतदाताओं की भूमिका, विपक्षी नेताओं के वादे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य संबंधी अटकलें शामिल हैं।

रणनीतिक प्रचार: एक सुनियोजित योजना

धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अलग-अलग चुनाव प्रचार करना उनकी 'योजना का हिस्सा' है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय रणनीतिक रूप से लिया गया है ताकि एनडीए के सभी नेता अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार कर सकें और अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंच बना सकें और प्रधान ने यह भी याद दिलाया कि चुनाव से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार सरकार के निमंत्रण पर 7-8 सरकारी कार्यक्रमों में भाग लिया था, जो उनकी एकजुटता का प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, 24 अक्टूबर को जननायक कर्पूरी ठाकुर के गाँव समस्तीपुर में चुनाव प्रचार की शुरुआत के दौरान प्रधानमंत्री। मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान सहित एनडीए के सभी प्रमुख नेता एक साथ मौजूद थे। यह दर्शाता है कि गठबंधन में कोई मतभेद नहीं है, बल्कि यह एक प्रभावी प्रचार रणनीति है।

एनडीए की अटूट एकता और नीतीश कुमार का परिपक्व नेतृत्व

जब प्रधान से पूछा गया कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से नाराज हो गए तो क्या होगा, तो उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने नीतीश कुमार को 'अहंकारी' कहना अन्याय बताया और उन्हें भारतीय राजनीति के 'बहुत कम परिपक्व और शांत दिमाग वाले नेताओं' में से एक करार दिया। प्रधान ने कहा कि वह नीतीश कुमार को बचपन से जानते हैं और उनकी नीतियों और दृढ़ विचारों का सम्मान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनडीए एक 'सामाजिक गठबंधन' है, न कि केवल राजनीतिक, और इसी कारण से उनकी राय समान है और प्रधान ने विश्वास व्यक्त किया कि नीतीश कुमार, भाजपा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के साथ मिलकर बिहार के विकास के लिए '100% गारंटी वाला फॉर्मूला' हैं। यह बयान गठबंधन की आंतरिक मजबूती और भविष्य की दिशा को स्पष्ट करता है।

महिला और युवा मतदाता: विकास और कानून-व्यवस्था के पैरोकार

धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार विधानसभा चुनाव में महिला और युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे और उन्होंने कहा कि ये मतदाता 'विकास और कानून-व्यवस्था' के मुद्दों पर एकजुट होते हैं और उन्हें उम्मीद है कि एनडीए का नेतृत्व उनकी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी के 'विजन' और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'अनुभव' को बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सक्षम बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बार इन मतदाताओं की आकांक्षाएं पूरी होंगी, जो एनडीए के पक्ष में एक मजबूत जनादेश का संकेत है। यह टिप्पणी इन महत्वपूर्ण मतदाता समूहों पर गठबंधन के फोकस को दर्शाती है।

तेजस्वी यादव के वादों पर प्रधान का करारा जवाब

राजद नेता तेजस्वी यादव के 'हर घर में एक सरकारी नौकरी' देने के वादे पर धर्मेंद्र प्रधान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इस वादे को 'सूरज, चांद और तारे देने' जैसा अव्यावहारिक बताया। प्रधान ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में 2. 75 करोड़ परिवार हैं और राज्य का बजट लगभग 3 लाख करोड़ रुपये है, जबकि 2. 75 करोड़ लोगों को वेतन देने में 12-15 लाख करोड़ रुपये। का खर्च आएगा, जो राज्य के बजट से कहीं अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने 'ज़मीन छीन ली' और जिनकी राजनीति 'सिर्फ़ अपने परिवार तक सीमित' है, क्या वे ऐसा कर सकते हैं? प्रधान ने कहा कि बिहार के युवा आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं और वे जानते हैं कि कौन उनकी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार के 'दो भाई' के रूप में बिहार के विकास के आश्वासन को लोगों के लिए एक विश्वसनीय वादा बताया।

राहुल गांधी पर 'जनरेशन Z' टिप्पणी के लिए हमला

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'जनरेशन Z' वाले बयान पर धर्मेंद्र प्रधान ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी को 'सोने का चम्मच लेकर पैदा हुआ' व्यक्ति बताया, जिसे 'देश की समझ नहीं' है। प्रधान ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने 'शुरू से ही जनरेशन Z का गला घोंटा है', वे अब नसीहत क्यों दे रहे हैं? उन्होंने राहुल गांधी के विपक्ष के नेता के रूप में संविधान, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और सुरक्षा बलों को 'गाली देने' के अधिकार पर भी सवाल उठाया। प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी एक संपन्न परिवार से आते हैं और उन्हें लगता है कि जो वे कहते हैं, वही होना चाहिए, लेकिन 'जनरेशन Z इस अहंकार को तोड़ रही है' और यह टिप्पणी विपक्षी नेतृत्व पर भाजपा के आक्रामक रुख को दर्शाती है।

नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर प्रधान का स्पष्टीकरण

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर चल रही अटकलों पर धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार हर दिन 250 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं और पिछले दो महीनों से वे उनके लगातार संपर्क में हैं। प्रधान ने कहा कि वे नीतीश कुमार को पिछले 20-25 वर्षों से जानते हैं और उन्हें उनके स्वास्थ्य में कोई अंतर नहीं दिखता। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी की उम्र के आधार पर उसके स्वास्थ्य का आकलन कैसे किया जा सकता है। प्रधान ने एक बार फिर दोहराया कि एनडीए के सभी दलों के बीच 'पूर्ण एकता, समझ और विश्वास' है, जिससे गठबंधन की स्थिरता और नेतृत्व की क्षमता पर कोई संदेह नहीं है।

पीएम मोदी और सीएम नीतीश: बिहार के विकास के दो चेहरे

जब प्रधान से पूछा गया कि क्या वह भाजपा के 'लकी मैस्कॉट' हैं, तो उन्होंने इस तरह की प्रतिक्रिया को विनम्रता से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जमीन पर सच्चाई नहीं है और जहां भी चुनाव होते हैं, पार्टी को राज्य की राजनीतिक संरचना के अनुसार बड़ा बनाना होता है। प्रधान ने बिहार में पिछले 20 वर्षों से एनडीए की उपस्थिति और उसकी विश्वसनीयता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों से मुख्यमंत्री हैं और बिहार उन राज्यों में से एक है जिसे पिछले 11 वर्षों में केंद्र की नीतियों का सबसे अधिक लाभ मिला है। प्रधान ने निष्कर्ष निकाला कि जब निष्पक्ष विकास होता है, तो यह विश्वसनीयता पैदा करता है, और इन चुनावों में, प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दो प्रमुख चेहरे हैं जिन पर बिहार के पार्टी कार्यकर्ता समन्वय करते हैं और अनुभव प्राप्त करते हैं। यह बयान एनडीए के सामूहिक नेतृत्व और बिहार के लिए उनके विकास एजेंडे को रेखांकित करता है।

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