BRICS समिट: साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, बिना नाम लिए होगी युद्ध की निंदा

दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देश साझा घोषणापत्र पर सहमत हो गए हैं। इसमें किसी देश का नाम लिए बिना एकतरफा युद्ध की निंदा की जाएगी। भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन में रूस, चीन और ब्राजील सहित कई देशों के प्रमुख शामिल हैं।

भारत की राजधानी दिल्ली में आज से शुरू हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। मेजबान भारत के साथ-साथ रूस, चीन और ब्राजील समेत समूह के कई प्रभावशाली देशों के प्रमुख इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। शिखर सम्मेलन की कार्यवाही के बीच यह जानकारी मिली है कि समूह में शामिल सभी सदस्य देश एक साझा घोषणापत्र (Joint Declaration) जारी करने को लेकर पूरी तरह से राजी हो गए हैं। इस घोषणापत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें किसी भी देश की ओर से किए जाने वाले एकतरफा युद्ध की कड़े शब्दों में निंदा की जाएगी। यह सहमति वैश्विक कूटनीति के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

साझा घोषणापत्र पर बनी महत्वपूर्ण सहमति

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से यह दावा किया गया है कि ब्रिक्स के सदस्य देश एक साझा घोषणापत्र तैयार करने पर सहमत होते दिख रहे हैं। इस घोषणापत्र को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी और अब सदस्य देशों के बीच एक आम राय बनती नजर आ रही है। हालांकि, कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए इस घोषणापत्र में किसी भी विशिष्ट देश का नाम नहीं लिया जाएगा। इसके बजाय, इसमें एक सामान्य सिद्धांत के रूप में किसी भी देश द्वारा किए जाने वाले एकतरफा युद्ध की निंदा की जाएगी। माना जा रहा है कि ब्रिक्स देशों के नेता आज शनिवार को इस महत्वपूर्ण घोषणापत्र को अपनी औपचारिक मंजूरी दे देंगे, जिसके बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

सम्मेलन में शामिल प्रमुख देश और उनकी भूमिका

भारत की मेजबानी में आयोजित इस 2 दिवसीय ब्रिक्स समिट में दुनिया की कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं और शक्तिशाली देश शामिल हैं। इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश भी शामिल हैं। इन सभी देशों के प्रतिनिधि और प्रमुख नई दिल्ली में इस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए एकत्रित हुए हैं। इतने विविध हितों वाले देशों के बीच एक साझा घोषणापत्र पर सहमति बनाना भारत की अध्यक्षता और मेजबानी के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह सम्मेलन न केवल आर्थिक सहयोग बल्कि वैश्विक सुरक्षा और शांति के मुद्दों पर भी केंद्रित है।

ईरान और यूएई के बीच मतभेदों को सुलझाने की कोशिश

इस शिखर सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू सदस्य देशों के बीच के आपसी मतभेदों को दूर करना भी है। विशेष रूप से, सदस्य देशों के प्रतिनिधि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच की खाई को पाटने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं और खाड़ी क्षेत्र में शुरू हुए विभिन्न संघर्षों के कारण ये दोनों देश एक-दूसरे के विरोध में खड़े नजर आए हैं। ब्रिक्स समूह का प्रयास है कि इन दोनों देशों के बीच आम सहमति बनाई जा सके ताकि एक ऐसा साझा घोषणापत्र तैयार हो जिसे सभी सदस्य बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार करें। यह कूटनीतिक प्रयास दर्शाता है कि ब्रिक्स केवल एक आर्थिक मंच नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने और आपसी सहयोग बढ़ाने का भी एक माध्यम बन रहा है।

एकतरफा युद्ध की निंदा का वैश्विक संदेश

घोषणापत्र में एकतरफा युद्ध की निंदा करने का निर्णय वैश्विक राजनीति में एक बड़ा संदेश देने की कोशिश है। बिना किसी देश का नाम लिए इस तरह की निंदा करना यह दर्शाता है कि ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता का सम्मान करने के पक्ष में हैं। यह रणनीति उन देशों को भी एक मंच पर लाने में मदद करती है जिनके विचार अलग-अलग हो सकते हैं। शनिवार को जब इस घोषणापत्र पर अंतिम मुहर लगेगी, तो यह ब्रिक्स समूह की एकजुटता और वैश्विक मुद्दों पर उनके साझा दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखेगा। दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।