ब्रिक्स समिट के बीच पीएम मोदी की बड़ी बैठकें, मलेशिया इथियोपिया और यूएई के नेताओं से चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मलेशिया, इथियोपिया और यूएई के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिसमें व्यापार, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हुई हैं। इस महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन के कारण राजधानी में विदेशी मेहमानों का जमावड़ा लगा हुआ है। इस व्यस्त माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं ताकि विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाया जा सके। शनिवार 12 सितंबर को प्रधानमंत्री ने तीन प्रमुख देशों के लीडर्स के साथ अलग-अलग मुलाकातें कीं। इन बैठकों में मलेशिया के प्रधानमंत्री, इथियोपिया के प्रधानमंत्री और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के क्राउन प्रिंस शामिल थे। इन मुलाकातों के दौरान व्यापार, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से मंथन किया गया।

मलेशिया के साथ सहयोग के नए आयाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी के विशेष निमंत्रण पर मलेशिया इस बार ब्रिक्स के एक साझेदार देश के रूप में शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहा है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में प्रधानमंत्री इब्राहिम का गर्मजोशी से स्वागत किया और ब्रिक्स समिट में पार्टनर देश के तौर पर मलेशिया की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान लिए गए निर्णयों और उनके नतीजों का जायजा लिया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की गहन समीक्षा की।

भारत और मलेशिया के बीच हुई इस चर्चा में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, फिनटेक, शिक्षा, पर्यटन और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल रहे। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कोटा किनाबालु, सबाह में भारत का वाणिज्य दूतावास (Consulate General) खोलने के लिए मलेशिया की सहमति व्यक्त की और इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान-भारत संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन की भी प्रशंसा की। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए और भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इथियोपिया के साथ मजबूत होते रिश्ते

प्रधानमंत्री मोदी ने फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबिय अहमद अली के साथ भी एक विस्तृत द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और इथियोपिया के बीच ऐतिहासिक रिश्तों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के तरीकों पर चर्चा की और उन्होंने आर्थिक सहयोग, रक्षा और सुरक्षा साझेदारी तथा क्षमता निर्माण जैसे अहम क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। यह बातचीत प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर 2025 में अदीस अबाबा की ऐतिहासिक यात्रा के बाद शुरू हुए संवाद को आगे बढ़ाने की एक कड़ी थी।

दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए और उन्होंने विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ करीबी सहयोग बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने 18वें ब्रिक्स समिट में इथियोपिया की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी से ‘ग्लोबल साउथ’ की सामूहिक आवाज को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिली है।

यूएई के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर

इन बैठकों के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित की गई थी। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और यूएई के बीच पहले से मौजूद व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाना था और दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा परियोजनाओं की गति बढ़ाने पर चर्चा की।

दिल्ली में आयोजित इन बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को लेकर अत्यंत गंभीर है। प्रधानमंत्री मोदी की ये मुलाकातें न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती हैं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद करती हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई ये चर्चाएं आने वाले समय में भारत की विदेश नीति और आर्थिक संबंधों को एक नई दिशा प्रदान करेंगी।