रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की राजधानी नई दिल्ली से यूरोपीय देशों को एक अत्यंत कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि यूरोपीय देश यूक्रेन की सीमा के भीतर अपने सैनिकों को भेजने का निर्णय लेते हैं, तो रूस इसे अपने खिलाफ सीधे युद्ध की शुरुआत के रूप में देखेगा। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता और संभावित जमीनी भागीदारी को लेकर गहन चर्चा चल रही है।
यूक्रेन में सैन्य तैनाती का मतलब सीधा संघर्ष
रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन की जमीन पर विदेशी सैनिकों की मौजूदगी युद्ध की परिभाषा को पूरी तरह बदल देगी। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अब वे यूक्रेन की जमीन पर सैनिक भेजने के बारे में बात कर रहे हैं, जिसका सीधा और एकमात्र मतलब रूस के साथ जंग होगा। हालांकि, इस कड़ी चेतावनी के साथ ही पुतिन ने यूरोपीय देशों को आश्वस्त करने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों को रूस से किसी भी प्रकार के खतरे की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। पुतिन के अनुसार, रूस का यूरोपीय देशों को धमकाने का न तो कोई इरादा है और न ही भविष्य में ऐसी कोई योजना है और उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर रूस ऐसा क्यों करेगा, क्योंकि रूस के पास यूरोप के साथ किसी भी प्रकार के संघर्ष का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है।
ऐतिहासिक समझौते और अंतरराष्ट्रीय कानून
पुतिन ने अपने बयान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस युद्ध के बाद सभी प्रमुख मुद्दों को सुलझा लिया गया था। इसके अलावा, सोवियत संघ के विघटन के बाद जो नई व्यवस्थाएं और समझौते बने, उन्हें भी रूस की पूर्ण सहमति से लागू किया गया था। पुतिन ने तर्क दिया कि इन स्थापित समझौतों के खिलाफ जाने वाला कोई भी कदम न केवल रूस के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के भी विपरीत होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस हमेशा से इन समझौतों का सम्मान करता रहा है और यूरोप के साथ किसी भी टकराव की स्थिति पैदा नहीं करना चाहता।
पांचवें साल में प्रवेश करता रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संघर्ष फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब यह युद्ध अपने 5वें साल में प्रवेश कर चुका है। इस लंबी अवधि के दौरान कई यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को निरंतर सैन्य और आर्थिक समर्थन प्रदान किया है। इस बीच, अमेरिका ने भी इस संघर्ष में मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने मॉस्को का दौरा किया था। वहां रूसी अधिकारियों से बातचीत करने के बाद उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की, ताकि बातचीत के जरिए समाधान की संभावनाओं को तलाशा जा सके।
ब्रिक्स सम्मेलन और मोदी-पुतिन की मुलाकात
राष्ट्रपति पुतिन 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए हुए हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। यह मुलाकात ब्रिक्स सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन से ठीक पहले हुई थी। दोनों नेताओं के बीच भारत और रूस के व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान 'प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030' को प्रभावी ढंग से लागू करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर भी बात हुई।
दो सप्ताह के भीतर दूसरी उच्च स्तरीय बैठक
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की शुक्रवार की यह मुलाकात पिछले 2 हफ्ते से भी कम समय में दोनों नेताओं के बीच हुई दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान मिले थे। ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से पुतिन द्वारा यूरोपीय देशों को दिया गया यह संदेश अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी महत्व रखता है। पुतिन ने यह साफ कर दिया है कि यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की किसी भी प्रकार की तैनाती को रूस एक रेड लाइन के रूप में देखेगा और इसका जवाब सीधे युद्ध के रूप में दिया जाएगा।
