बजट 2026 अब कुछ ही हफ्तों दूर है और इस बार सरकार का फोकस सिर्फ टैक्स या योजनाओं तक सीमित नहीं दिख रहा। चर्चा इस बात की है कि क्या भारत अब चीन पर अपनी भारी निर्भरता को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने जा रहा है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, रक्षा, मशीनरी और कच्चे माल जैसे अहम सेक्टरों में सरकार बड़ा रणनीतिक बदलाव कर सकती है। यह बदलाव भारत की आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
बढ़ती निर्भरता का जोखिम
पिछले कुछ वर्षों में कोरोना महामारी, वैश्विक युद्ध और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने ये साफ कर दिया है कि किसी एक देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना कितना जोखिम भरा हो सकता है। इन वैश्विक घटनाओं ने भारत की नीति निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर किया है कि केवल लागत-प्रभावशीलता पर ध्यान केंद्रित करना दीर्घकालिक स्थिरता के लिए पर्याप्त नहीं है। इन अनुभवों ने भारत की सोच को बदलने का काम किया है, जिससे अब देश आत्मनिर्भरता और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण की ओर अग्रसर है।
सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता
अब तक भारत की नीति ये रही कि जहां से सस्ता और आसानी से सामान मिले, वहीं से आयात कर लिया जाए। लेकिन अब सरकार समझने लगी है कि सिर्फ सस्ती कीमतें ही सब कुछ नहीं होतीं। अगर संकट के समय वही सप्लाई बंद हो जाए, तो पूरी इंडस्ट्री ठप पड़ सकती है और सरकार अब डी-रिस्किंग यानी जोखिम कम करने की नीति पर काम कर रही है। इसका मतलब ये नहीं है कि आयात पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा, बल्कि जहां जरूरी है वहां निर्भरता घटाई जाएगी और वैकल्पिक रास्ते तैयार किए जाएंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भविष्य के झटकों से बचाया जा सके।
भारत का चीन से आयात कई सेक्टरों में बहुत ज्यादा है। इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, सोलर पैनल, मशीनरी, खिलौने, छाते, चश्मे, कृषि उपकरण। और कई उपभोक्ता सामानों में चीन की हिस्सेदारी बेहद ऊंची है। कुछ क्षेत्रों में तो हालत यह है कि 80-90 फीसदी तक सामान चीन से। आता है, जो भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक और आर्थिक चिंता का विषय है। यही वजह है कि सरकार ने करीब 100 ऐसे उत्पादों की पहचान की है, जिनमें घरेलू उत्पादन बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम की जा सकती है। इन उत्पादों में ऐसे सामान शामिल हैं जो भारत में आसानी से बनाए जा सकते हैं या जिनके लिए वैकल्पिक स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
चीन से आयात: एक बड़ी चुनौती
बजट 2026 से उम्मीदें
बजट 2026 में सरकार कई तरह के कदम उठा सकती है। एक तरफ जहां घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जा सकता है, वहीं कुछ आयातित सामानों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है। मकसद ये है कि भारत में माल बनाना ज्यादा फायदेमंद हो और इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, स्टील और ग्रीन एनर्जी से जुड़े सेक्टरों में PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) जैसी योजनाओं को और मजबूत किया जा सकता है, ताकि कंपनियां भारत में गहराई से मैन्युफैक्चरिंग करें और केवल असेंबली तक सीमित न रहें।
मोबाइल विनिर्माण: असेंबली से आगे
भारत आज स्मार्टफोन उत्पादन में बड़ी ताकत बन चुका है, लेकिन हकीकत ये है कि मोबाइल के अहम पुर्जे जैसे सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल अभी भी बाहर से आते हैं। सरकार की कोशिश अब सिर्फ असेंबली तक सीमित न रहकर पूरे सप्लाई चेन को भारत में खड़ा करने की है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी प्लांट इस दिशा में बड़ा कदम माने। जा रहे हैं, जो देश को इन महत्वपूर्ण घटकों के लिए आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक बदलाव
तेल और गैस के मामले में भारत अभी भी आयात पर निर्भर है, लेकिन अब सरकार एक ही इलाके पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों से सप्लाई लेने की नीति अपना रही है। इसके साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी, सोलर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में वैश्विक तेल संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर कम पड़े और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और यह नीति भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता से बचाने में सहायक होगी।
नई प्रौद्योगिकियां, नई चुनौतियां
इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी और ग्रीन एनर्जी के दौर में नई तरह की निर्भरताएं सामने आ रही हैं और लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे खनिजों में भारत की आत्मनिर्भरता बेहद कम है। सरकार अब विदेशों में खनिज संपत्तियों में निवेश, सप्लाई एग्रीमेंट। और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। इसके लिए एक राष्ट्रीय मिशन भी शुरू किया गया है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये। का निवेश प्रस्तावित है, ताकि इन महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का महत्व
रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता सीधे देश की सुरक्षा से जुड़ी होती है। यही कारण है कि सरकार ने घरेलू रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता देना शुरू किया है। अब रक्षा खरीद में भारतीय कंपनियों को ज्यादा मौके दिए जा रहे हैं और निर्यात के रास्ते भी खोले जा रहे हैं, ताकि कंपनियां बड़े स्तर पर उत्पादन कर सकें और भारत रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख निर्यातक बन सके और यह कदम न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।
विशेषज्ञों की राय और आगे का रास्ता
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ आयात पर टैक्स बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। असली जरूरत है तकनीक, स्किल, फाइनेंस और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता विकसित करने की। अगर भारत को सच में चीन पर निर्भरता घटानी है, तो कंपनियों को यहां डिजाइन से लेकर निर्माण तक हर स्तर पर मजबूत बनाना होगा। इसके लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होगी जो भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सके।
Budget 2026 से उम्मीद है कि सरकार जोखिम को ध्यान में रखकर फैसले लेगी। नीति अब सिर्फ लागत कम करने की नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक ताकत बढ़ाने की होगी और अगर यह योजना सही तरीके से लागू हुई, तो आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम कर सकता है, बल्कि खुद एक मजबूत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब भी बन सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकेगा।