देश को केंद्रीय बजट 2026 का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन इस बार इसकी तारीख को लेकर एक दिलचस्प असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, आगामी वित्त वर्ष 2026-27 का बजट 1 फरवरी को पेश किया जा सकता है, जो कि एक रविवार है। आमतौर पर रविवार को सरकारी कामकाज बंद रहते हैं, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज छुट्टी के दिन पेश किया जाएगा? इस असामान्य स्थिति ने सभी का ध्यान खींचा है, और अब सबकी निगाहें बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बजट प्रस्तुति का रविवार का असमंजस
भारत में केंद्रीय बजट की प्रस्तुति एक महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन है, जो आमतौर पर कार्यदिवस पर होता है। 1 फरवरी, 2026 को रविवार होने के कारण, इस बार बजट की तारीख को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं और हालांकि, सरकारी गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, सरकार इस बार भी 1 फरवरी को ही बजट पेश करने की योजना बना रही है, भले ही उस दिन रविवार क्यों न हो। यह एक दुर्लभ अवसर होगा जब संसद छुट्टी के दिन चलेगी और देश का बही-खाता पेश किया जाएगा। अतीत में भी, विशेष परिस्थितियों में सरकारों ने रविवार को बजट पेश किया है, इसलिए यह कोई असंभव बात नहीं है, बल्कि एक विशेष निर्णय का संकेत है। इस कदम से यह भी सुनिश्चित हो सकता है कि आम जनता छुट्टी के दिन घर बैठे वित्त मंत्री का पूरा भाषण तसल्ली से सुन सके और समझ सके कि उनकी जेब पर क्या असर पड़ने वाला है।
तारीखों को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक
इस सस्पेंस को खत्म करने के लिए बुधवार को एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) की इस बैठक में संसद के बजट सत्र की तारीखों के साथ-साथ बजट पेश करने के दिन पर भी अंतिम मुहर लगेगी। यह समिति संसद के कामकाज और सत्रों के कार्यक्रम को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस बैठक का निर्णय न केवल बजट की तारीख तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट। करेगा कि क्या सरकार रविवार को बजट पेश करने की अपनी योजना पर अडिग है। यदि समिति अपनी रजामंदी देती है, तो यह देश के इतिहास में उन चुनिंदा मौकों में से एक होगा जब छुट्टी के दिन संसद चलेगी और बजट पेश किया जाएगा। यह निर्णय सरकार की प्राथमिकताओं और कार्यशैली को भी दर्शाएगा।
बजट सत्र का प्रस्तावित कार्यक्रम
बजट सत्र के कार्यक्रम को लेकर जो संभावित खाका तैयार हुआ है, वह काफी दिलचस्प है और इसमें कई महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं और खबरों की मानें तो बजट सत्र का आगाज 28 जनवरी से हो सकता है। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ होगी। राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार की नीतियों और आगामी वर्ष के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण अवलोकन प्रस्तुत करता है। इसके ठीक अगले दिन, यानी 29 जनवरी को देश का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया जा सकता। है, जो अर्थव्यवस्था की सेहत का रिपोर्ट कार्ड होता है और आगामी बजट के लिए पृष्ठभूमि तैयार करता है। इसके बाद 30 और 31 जनवरी को अवकाश रहने की संभावना है। ऐसे में अगर सरकार 1 फरवरी की तारीख पर ही अडिग रहती है, तो रविवार के दिन देश को नया बजट मिल सकता है।
सार्वजनिक भागीदारी और ऐतिहासिक मिसाल
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और वित्त मंत्रालय ने बजट की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। बजट तैयार करने की प्रक्रिया एक जटिल और विस्तृत कार्य है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श शामिल होता है। आंकड़ों का संकलन, नीतियों का निर्धारण और वित्तीय आवंटन का खाका तैयार करना एक लंबी प्रक्रिया है। मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है कि बजट देश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान करे और विकास को गति दे और तैयारियों का यह अंतिम चरण दर्शाता है कि सरकार अपनी योजनाओं को लेकर गंभीर है और निर्धारित समय-सीमा के भीतर बजट पेश करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रविवार को बजट पेश करने का एक अप्रत्याशित लाभ यह हो सकता है कि आम जनता को इसे देखने और समझने का अधिक अवसर मिलेगा। चूंकि अधिकांश लोग छुट्टी पर होंगे, वे घर बैठकर वित्त मंत्री का पूरा भाषण तसल्ली से सुन सकेंगे और। यह समझ सकेंगे कि बजट में उनके लिए क्या है और उनकी जेब पर इसका क्या असर पड़ने वाला है। यह वित्तीय साक्षरता और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने का एक अनूठा अवसर हो सकता है और जैसा कि पहले भी बताया गया है, यह कोई असंभव बात नहीं है। देश के इतिहास में ऐसे चुनिंदा मौके आए हैं जब विशेष परिस्थितियों में रविवार को बजट पेश किया गया है। यह दर्शाता है कि जब राष्ट्र के हित में आवश्यक हो, तो पारंपरिक कार्यप्रणाली में बदलाव किया जा सकता है और अब सभी की निगाहें बुधवार की कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की जाएगी।