नेपाल के हालिया संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। पार्टी अब प्रतिनिधि सभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गई है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि नेपाल में अगली सरकार का नेतृत्व RSP ही करेगी। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने RSP के शीर्ष नेतृत्व को फोन कर बधाई दी थी। प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश का जवाब देते हुए RSP अध्यक्ष रवि लामिछाने ने भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया है। लामिछाने ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आपसी सम्मान और साझा समृद्धि के सिद्धांतों पर आधारित 'विकास कूटनीति' को प्राथमिकता देगी।
रवि लामिछाने का आधिकारिक बयान और आभार
RSP के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की गर्मजोशी भरी बधाई और नेपाली जनता के लोकतांत्रिक फैसले को दी गई मान्यता के लिए वे उनके आभारी हैं। लामिछाने के अनुसार, RSP और उनकी आगामी सरकार भारत के साथ संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए समर्पित रहेगी। उन्होंने विशेष रूप से 'विकास कूटनीति' का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल भारत के साथ ऐसी साझेदारी की आकांक्षा रखता है जो कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक पर्यटन, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम स्थापित करे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सहयोग से दोनों देशों के नागरिकों का भविष्य समृद्ध होगा।
प्रधानमंत्री मोदी और नेपाली नेताओं के बीच टेलीफोनिक वार्ता
इससे पूर्व, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को RSP अध्यक्ष रवि लामिछाने और पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेंद्र शाह से टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत की थी। प्रधानमंत्री ने इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने दोनों नेताओं को उनकी चुनावी सफलता और RSP के शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने नई सरकार के गठन के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं और नेपाल की प्रगति, समृद्धि और जनकल्याण के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों से भारत-नेपाल संबंध एक नई ऊंचाई को स्पर्श करेंगे। यह संवाद दोनों देशों के बीच भविष्य के कूटनीतिक रोडमैप के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संसदीय चुनाव परिणाम और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का प्रदर्शन
नेपाल में 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा के लिए मतदान संपन्न हुआ था। नेपाल की चुनावी प्रणाली के तहत 165 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) और 110 सीटें अनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) के आधार पर तय की जाती हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, FPTP श्रेणी में RSP ने 124 सीटों पर जीत दर्ज की है और 1 अन्य सीट पर वह बढ़त बनाए हुए है। इसके विपरीत, नेपाल की पारंपरिक बड़ी पार्टियों को इस चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। नेपाली कांग्रेस को अब तक केवल 17 सीटें मिली हैं, जबकि CPN-UML को 8 सीटों पर जीत हासिल हुई है। अन्य दलों में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को 7, श्रम संस्कृति पार्टी को 3 और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को 1 सीट प्राप्त हुई है। एक निर्दलीय उम्मीदवार महाबीर पुन भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।
नेपाल की नई राजनीतिक दिशा और बहुमत का समीकरण
निर्वाचन आयोग के रुझानों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी अनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) कोटे के तहत भी लगभग 60 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है। यदि वर्तमान रुझान अंतिम परिणामों में परिवर्तित होते हैं, तो 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में RSP की कुल सदस्य संख्या 185 के आसपास पहुंच सकती है। नेपाल के संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 184 सीटों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, RSP एक मजबूत और स्थिर सरकार बनाने की स्थिति में है और यह चुनावी परिणाम नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां मतदाताओं ने पारंपरिक राजनीतिक दलों के स्थान पर एक नई पार्टी और उसके नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
भारत-नेपाल द्विपक्षीय संबंधों के प्राथमिकता वाले क्षेत्र
नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ ही भारत के साथ उसके संबंधों के भविष्य पर भी चर्चा तेज हो गई है। रवि लामिछाने के बयानों से संकेत मिलता है कि नई सरकार आर्थिक और बुनियादी ढांचागत विकास को केंद्र में रखेगी। कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सड़क और रेल नेटवर्क का विस्तार, ऊर्जा क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं पर सहयोग और व्यापारिक बाधाओं को दूर करना दोनों देशों की साझा प्राथमिकताएं हो सकती हैं और इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक पर्यटन के माध्यम से दोनों देशों के बीच 'पीपल-टू-पीपल' संपर्क को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा। भारत ने हमेशा 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत नेपाल को प्राथमिकता दी है, और अब नई सरकार के साथ इन संबंधों को और अधिक रणनीतिक गहराई मिलने की संभावना है।
