कैबिनेट का बड़ा फैसला: 100 नए एयरपोर्ट और उड़ान योजना का विस्तार।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश में 100 नए एयरपोर्ट के निर्माण और उड़ान योजना को 2036 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही 200 नए हेलीपैड और इमिग्रेशन प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए IVFRT योजना को भी विस्तार दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के बुनियादी ढांचे और नागरिक उड्डयन क्षेत्र को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में 100 नए एयरपोर्ट के निर्माण को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई संपर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही, आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सस्ता और सुलभ बनाने वाली 'उड़ान' (UDAN) योजना के विस्तार को भी हरी झंडी दे दी गई है और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान इन फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन परियोजनाओं के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र पिछले एक दशक में तेजी से उभरा है। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS) के तहत शुरू की गई उड़ान योजना ने छोटे शहरों को हवाई मानचित्र पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसी सफलता को देखते हुए सरकार ने अब इस योजना के अगले चरण और बुनियादी ढांचे के व्यापक विस्तार की योजना तैयार की है। कैबिनेट के इन फैसलों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।

100 नए एयरपोर्ट का निर्माण और 'चैलेंज मोड' प्रक्रिया

कैबिनेट ने देश भर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस पूरी परियोजना के लिए सरकार ने ₹12,159 करोड़ का कुल बजट निर्धारित किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एक एयरपोर्ट के निर्माण पर औसतन ₹100 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है। इन एयरपोर्ट्स का चयन और निर्माण 'चैलेंज मोड' के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत विभिन्न शहरों और राज्यों के बीच एक प्रतिस्पर्धा होगी। जो राज्य या शहर एयरपोर्ट के लिए आवश्यक भूमि, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं सबसे पहले और सबसे बेहतर तरीके से उपलब्ध कराएगा, उसे एयरपोर्ट निर्माण के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। यह मॉडल परियोजनाओं के तेजी से कार्यान्वयन और राज्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनाया गया है।

उड़ान योजना का 2036 तक विस्तार और वित्तीय आवंटन

देश के छोटे और मध्यम शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने वाली 'उड़ान' योजना को अब अगले 10 वर्षों के लिए विस्तार दे दिया गया है। कैबिनेट ने इस योजना को साल 2036 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस विस्तार के लिए सरकार ने ₹28,840 करोड़ का विशाल बजट आवंटित किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य हवाई किराए को किफायती रखना है ताकि समाज का मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग भी हवाई यात्रा का लाभ उठा सके। योजना के तहत एयरलाइंस को वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) प्रदान की जाती है, जिससे वे कम किराए पर उड़ानें संचालित कर सकें। अगले एक दशक में इस योजना के माध्यम से सैकड़ों नए हवाई मार्गों को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

200 आधुनिक हेलीपैड और स्वदेशी विमानों को प्रोत्साहन

हवाई संपर्क को और अधिक सूक्ष्म स्तर पर ले जाने के लिए सरकार ने 200 नए और आधुनिक हेलीपैड बनाने का निर्णय लिया है। ये हेलीपैड मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और द्वीपीय क्षेत्रों में बनाए जाएंगे, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बड़े रनवे बनाना चुनौतीपूर्ण है। इस परियोजना के लिए ₹3,661 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत स्वदेशी विमानों के निर्माण और खरीद को बढ़ावा देने के लिए ₹400 करोड़ की राशि निर्धारित की है। इसका उद्देश्य विमानन क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करना और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना है।

IVFRT योजना का विस्तार और इमिग्रेशन आधुनिकीकरण

सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, कैबिनेट ने 'इमिग्रेशन, वीजा और विदेशी पंजीकरण ट्रैकिंग' (IVFRT) योजना को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह योजना अब 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी। इस परियोजना के लिए ₹1,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है। IVFRT का मुख्य उद्देश्य भारत की इमिग्रेशन और वीजा प्रणाली को पूरी तरह से आधुनिक और डिजिटल बनाना है। इससे विदेशी पर्यटकों के पंजीकरण और उनकी ट्रैकिंग की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित हो जाएगी। यह प्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ 'ईज ऑफ ट्रैवल' को भी बढ़ावा देगी।

नए पर्यावरण लक्ष्य और 2025-2035 की प्रतिबद्धताएं

कैबिनेट की बैठक में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने साल 2025 से 2035 तक की अवधि के लिए नए पर्यावरण लक्ष्य तय किए हैं। कैबिनेट ने इन नई प्रतिबद्धताओं को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इन लक्ष्यों के तहत देश में कार्बन उत्सर्जन को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और प्रकृति के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और सरकार का उद्देश्य विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित किया जा सके। इन लक्ष्यों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।