आज के दौर में कार इंश्योरेंस केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं रह गया है, बल्कि यह वाहन मालिकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या और वाहनों की मरम्मत की लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए एक सही और व्यापक इंश्योरेंस पॉलिसी का चुनाव करना अब अनिवार्य हो गया है। हालांकि, देखने में आता है कि कई लोग पॉलिसी खरीदते समय कुछ ऐसी आम गलतियां कर बैठते हैं, जिनकी वजह से भविष्य में क्लेम प्राप्त करने के समय उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
केवल कम प्रीमियम देखकर फैसला करने से बचें
इंश्योरेंस खरीदते समय कई ग्राहकों का पूरा ध्यान केवल इस बात पर होता है कि प्रीमियम की राशि कितनी कम है। लेकिन अक्सर कम कीमत वाली पॉलिसियों में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा सुविधाएं शामिल नहीं होती हैं। उदाहरण के तौर पर, इंजन प्रोटेक्शन, जीरो डेप्रिसिएशन कवर, रोडसाइड असिस्टेंस और कंज्यूमेबल कवर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं अक्सर मूल पॉलिसी का हिस्सा नहीं होतीं और इन्हें अलग से लेना पड़ सकता है। यदि आप बिना कवरेज को गहराई से समझे केवल सस्ती पॉलिसी का चुनाव कर लेते हैं, तो किसी दुर्घटना के बाद होने वाला भारी खर्च आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकता है। इसलिए प्रीमियम की तुलना करने के साथ-साथ मिलने वाले लाभों को भी परखना जरूरी है।
सही और सटीक जानकारी देना है अनिवार्य
इंश्योरेंस कंपनी को अपने वाहन से जुड़ी हर एक जानकारी बिल्कुल सही-सही देनी चाहिए। कई बार वाहन मालिक कार में किए गए किसी भी प्रकार के मॉडिफिकेशन, वाहन के वास्तविक इस्तेमाल या अन्य जरूरी विवरणों को छिपा लेते हैं। जब बाद में क्लेम के लिए आवेदन किया जाता है, तो कंपनी अपनी जांच के दौरान यदि कोई गलत जानकारी पाती है, तो वह दावे को तुरंत खारिज कर सकती है। इसलिए पॉलिसी लेते समय सभी दस्तावेजों और जानकारियों को पूरी ईमानदारी और समझदारी के साथ साझा करना चाहिए।
क्लेम करते समय इन विशेष बातों का रखें ध्यान
किसी भी दुर्घटना के घटित होने के तुरंत बाद सबसे पहला काम इंश्योरेंस कंपनी को सूचित करना होना चाहिए और यदि घटना की जानकारी देने में बहुत अधिक देरी की जाती है, तो इससे पूरी क्लेम प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और दावा खारिज होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, कुछ ऐसी विशेष परिस्थितियां भी होती हैं जिनमें कंपनी क्लेम स्वीकार नहीं करती है। उदाहरण के लिए, यदि वाहन नशे की हालत में चलाया जा रहा हो, चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो या पॉलिसी का समय पर रिन्यूअल न कराया गया हो। ऐसी स्थितियां क्लेम रिजेक्शन का मुख्य कारण बनती हैं।
रजिस्टर्ड और मान्यता प्राप्त प्रक्रिया ही अपनाएं
कई लोग छोटी-मोटी दुर्घटना होने के बाद सीधे अपने पास के किसी स्थानीय और गैर-रजिस्टर्ड गैरेज में वाहन की मरम्मत करवा लेते हैं और बाद में इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम की उम्मीद करते हैं। लेकिन अधिकांश इंश्योरेंस कंपनियां ऐसी मरम्मत के खर्च को कवर नहीं करती हैं। इसलिए वाहन को हमेशा कंपनी द्वारा मान्यता प्राप्त और रजिस्टर्ड सर्विस सेंटर पर ही ले जाना चाहिए। सही कार इंश्योरेंस चुनना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसके नियमों और शर्तों को बारीकी से समझना भी है। थोड़ी सी जागरूकता आपको भविष्य में होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से सुरक्षित रख सकती है।
