चीन में कोरोना का नया खतरा: NB.1.8.1 वैरिएंट का प्रसार, जानें भारत पर असर

चीन में जून के दौरान कोरोना के 79 हजार नए मामले सामने आए हैं, जहां ओमिक्रॉन का NB.1.8.1 वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। संक्रमण दर 16.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, हालांकि लक्षण हल्के हैं। विशेषज्ञों ने भारत को सतर्क रहने की सलाह दी है, विशेषकर बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए।

चीन में एक बार फिर कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि, इस बार हालात 2020 में वुहान से शुरू हुई महामारी जैसे नहीं हैं। चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस बार संक्रमण तेजी से जरूर फैल रहा है, लेकिन ज्यादातर मरीजों में हल्के लक्षण हैं और गंभीर मामलों की संख्या बहुत कम है। जून महीने में चीन में करीब 79000 नए कोरोना मरीज मिले। इनमें 130 मरीज गंभीर हालत में थे और 1 व्यक्ति की मौत हुई। स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।

ओमिक्रॉन का NB.1.8.1 वैरिएंट और संक्रमण दर

1 वैरिएंट सबसे ज्यादा फैल रहा है। यह वैरिएंट अब मीडियम लेवल पर फैल रहा है। 3 प्रतिशत हो गई है। इससे एक हफ्ते पहले यह 12 प्रतिशत के आसपास थी। 6 प्रतिशत रह गई है। यानी इस साल पहली बार कोरोना, फ्लू से ज्यादा फैलने वाला संक्रमण बन गया है।

लक्षण और रिकवरी की स्थिति

चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर मरीजों में बुखार, गले में दर्द और सर्दी-जुकाम जैसे हल्के लक्षण हैं और ज्यादातर लोग 5 से 7 दिन में ठीक हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि नए वैरिएंट पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर नहीं हैं। संक्रमण बढ़ा है, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामलों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह एक राहत की बात है कि वायरस का स्वरूप फिलहाल जानलेवा नहीं दिख रहा है।

वायरस के तेजी से फैलने के मुख्य कारण

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गर्मियों में लोग ज्यादा समय एयर कंडीशनर वाले बंद कमरों में बिताते हैं। साथ ही, गर्मियों की छुट्टियों में यात्रा भी बढ़ जाती है और इससे वायरस को फैलने का मौका मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि समय के साथ पहले के संक्रमण और वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी कम हो जाती है। इसलिए समय-समय पर कोरोना के मामले बढ़ सकते हैं और आने वाले महीनों में कुछ जगहों पर छोटे-छोटे आउटब्रेक भी देखने को मिल सकते हैं।

पिछले आंकड़ों से तुलना

चीन के डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले साल मई 2025 में कोरोना की पॉजिटिविटी दर 20 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गई थी। इस बार संक्रमण उस स्तर से काफी नीचे है। यह दर्शाता है कि हालांकि मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन यह अभी तक के सबसे खराब दौर जैसा नहीं है। स्वास्थ्य प्रणालियां इस स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं और लोगों को केवल बुनियादी सावधानियां बरतने के लिए कहा जा रहा है।

क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?

फिलहाल भारत के लिए घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। 1 वैरिएंट पहले की तरह खतरनाक साबित हो रहा है। भारत में भी इस वैरिएंट से जुड़ी कोई असामान्य स्थिति सामने नहीं आई है। फिर भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज सावधानी बरतें। चीन में कोरोना के मामले जरूर बढ़े हैं, लेकिन अभी वुहान जैसी महामारी या बड़े स्वास्थ्य संकट की आशंका नहीं दिख रही है और भारत के लिए भी फिलहाल सबसे जरूरी बात घबराना नहीं, बल्कि सतर्क रहना है।