India-China Relation / चीन भारत को उर्वरक, रेयर अर्थ मटेरियल और सुरंग खोदने वाली मशीनों की आपूर्ति के लिए तैयार

भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव दिखने लगे हैं। बीजिंग ने भारत को उर्वरक, रेयर अर्थ मटेरियल और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया। वांग यी की भारत यात्रा के दौरान एस. जयशंकर संग वार्ता में सीमा तनाव कम करने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

India-China Relation: भारत और चीन के बीच संबंधों में सकारात्मक बदलाव का दौर शुरू हो गया है, और इसके स्पष्ट संकेत अब नजर आने लगे हैं। हाल ही में, बीजिंग ने भारत को उर्वरक, रेयर अर्थ मटेरियल, और टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) की आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया है। यह आश्वासन चीनी विदेश मंत्री वांग यी की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई मुलाकात में दिया गया। गौरतलब है कि जयशंकर ने पिछले महीने अपनी चीन यात्रा के दौरान वांग यी के साथ यूरिया, एनपीके, डीएपी, दुर्लभ मृदा खनिजों, और टीबीएम की आपूर्ति का मुद्दा उठाया था।

तनाव कम करने की प्रक्रिया पर जोर

वांग यी के साथ मुलाकात में जयशंकर ने इस बात पर बल दिया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जो आपसी सम्मान, संवेदनशीलता, और परस्पर हितों पर आधारित हो। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने की प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच पिछले चार साल से अधिक समय से गतिरोध बना हुआ है, जो द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक प्रमुख चुनौती रहा है।

भारत का रुख स्पष्ट

बैठक के दौरान, जयशंकर ने ताइवान के मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि भारत, दुनिया के अन्य देशों की तरह, ताइवान के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के लिए राजनयिक उपस्थिति बनाए रखेगा। इसके साथ ही, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वाशिंगटन की मौजूदा नीतियों के कारण उन्हें अपने संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत है। यह एक रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकता है।

वांग यी का दौरा क्यों है अहम?

चीनी विदेश मंत्री वांग यी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जल्द ही चीन की यात्रा करने वाले हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था, जिसने दोनों देशों के बीच विश्वास को प्रभावित किया था। इस पृष्ठभूमि में, वांग यी की यात्रा को दोनों पड़ोसी देशों द्वारा संबंधों को सामान्य करने और विश्वास बहाली के प्रयासों के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

भविष्य की राह

वांग यी की यात्रा और दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई चर्चा से यह स्पष्ट है कि भारत और चीन अपने संबंधों को एक नए और सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपूर्ति श्रृंखला की बहाली, तनाव कम करने की प्रक्रिया, और आपसी हितों पर आधारित सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यह न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी सकारात्मक संकेत है।

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