मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच देश की आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी (CNG) के दामों में भी इजाफा कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के बजट को प्रभावित किया हुआ है। पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के तुरंत बाद सीएनजी की दरों में यह बदलाव देखने को मिला है। 09 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं।
मुंबई और एमएमआर क्षेत्र में कीमतों का हाल
दिल्ली से पहले आर्थिक राजधानी मुंबई में भी सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। मुंबई में गुरुवार को ही सीएनजी के दाम बढ़ा दिए गए थे। महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया था। इस नई दर के लागू होने के बाद मुंबई के साथ-साथ ठाणे, नवी मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के अन्य इलाकों में भी सीएनजी की कीमतें बढ़ गई हैं। अब इन क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को सीएनजी के लिए 84 रुपये प्रति किलो की दर से भुगतान करना पड़ रहा है। इससे पहले इन इलाकों में उपभोक्ताओं को 82 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान करना पड़ता था।
परिवहन और किराए पर पड़ने वाला प्रभाव
सीएनजी की कीमतों में हुई इस वृद्धि का सीधा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है। मुंबई में जब 2 रुपये प्रति किलो के दाम बढ़े, तो वहां के ऑटो रिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने तुरंत किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है। ऑटो रिक्शा संगठनों ने प्रशासन के सामने न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की बढ़ोतरी की मांग रखी है। यूनियन नेताओं का स्पष्ट कहना है कि मौजूदा किराए में वाहन चलाना अब आर्थिक रूप से उनके लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा है। अब दिल्ली में भी सीएनजी के दाम बढ़ गए हैं, जिसकी सीधी मार कैब ड्राइवरों पर पड़ सकती है।
आम आदमी की जेब पर दोहरी मार
दिल्ली में भी सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद अब कैब ड्राइवरों और ऑटो चालकों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि इससे ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी हो सकती है और इसके अलावा, सीएनजी का उपयोग माल ढुलाई और डिलीवरी सेवाओं में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत में भी इजाफा होने की पूरी संभावना है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
ईंधन की इन बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है। डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी होने से आम आदमी की जेब पर बोझ और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मध्य-पूर्व तनाव के बीच आम आदमी को लगा यह झटका काफी बड़ा माना जा रहा है।
