Corona Vaccine / चीनी वैक्सीन के बिना कोरोना को हराना मुश्किल, सवालों से बौखलाया ड्रैगन

Zoom News : Dec 24, 2020, 08:06 PM
Corona Vaccine: कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत हुए एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत के बाद अब कई वैक्सीन्स मिल सकी हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन समेत कई जगह लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू भी हो चुकी है, जबकि भारत समेत कुछ देशों में जल्द ही टीके लगाए जाएंगे। जिन देशों ने वैक्सीन बनाई है, उनमें चीन भी शामिल है, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी वैक्सीन पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। इसके चलते, ड्रैगन तिलमिला गया है और उसने दो टूक कहा है कि अगर कोरोना को हराना है तो फिर चीन की वैक्सीन का इस्तेमाल करना होगा। चीनी सरकार के प्रोपेगैंडा अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक आर्टिकल लिखकर चीन की कोरोना वैक्सीन पर सवाल उठा रहे देशों को खरीखोटी सुनाई है।

चीन ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया है कि उसकी वैक्सीन (चीन) पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, ''चीन के समयानुसार, गुरुवार की सुबह, ब्राजील के बुटनान इंस्टीट्यूट ने चीन की सिनोवैक कोरोना वैक्सीन के 50 फीसदी से ज्यादा प्रभावी होने की जानकारी दी। इससे यह इमरजेंसी अप्रूवल के लिए योग्य हो गई है। चीनी कंपनी पूरी तस्वीर को अंतिम रूप देने से पहले तुर्की और इंडोनेशिया जैसे अन्य देशों में परीक्षणों से डाटा एकत्र करके उसका विश्लेषण करेगी, लेकिन पश्चिमी मीडिया ने तुरंत 'पारदर्शिता' को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।''

आर्टिकल में आगे कहा गया है कि सिनोवैक की वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षणों को पूरा करने वाला ब्राजील पहला देश था। इसने पुष्टि की है कि वैक्सीन की प्रभावकारिता 50 फीसदी से अधिक है। सिनोवैक वैक्सीन के तीसरे फेज के परीक्षण के दौरान कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं बताए गए हैं। हालांकि, ब्राजील में एक दुर्घटना के बारे में खबर थी, लेकिन जल्द ही यह साबित हो गया था कि इसका टीके से कोई लेना-देना नहीं है। 

अमेरिकी वैक्सीन पर चीन ने खड़े किए सवाल

अमेरिकी कोरोना वैक्सीन्स पर भी चीन ने सवाल खड़े किए हैं। चीन ने कहा है कि अमेरिकी वैक्सीन्स भी कई मामलों में कमजोर हैं। शुरुआत अमेरिका की फाइजर वैक्सीन के तीसरे ट्रायल में इस्तेमाल किए गए सैंपल से करते हैं। कंपनी ने जानकारी को स्वतंत्र रूप से किसी तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापित नहीं कराया है। वहीं, फाइजर एमआरएनए वैक्सीन है, जिसे माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान में स्टोर करना होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो इसे विकासशील देशों के बजाय, अमीर देशों के लिए बनाया गया है। आर्टिकल में आगे कहा है कि यहां यह भी बताना जरूरी है कि फाइजर टीके के कुछ रिएक्शन्स भी सामने आए थे। इसके बावजूद, पश्चिमी देशों की मीडिया ने गंभीर विषयों को तूल नहीं दिया। उन्होंने इन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

ज्यादा सुरक्षित है चीन की सिनोवैक वैक्सीन

अपनी कोरोना वैक्सीन की प्रशंसा करते हुए चीन के ग्लोबल टाइम्स ने कहा, ''चीन की सिनोवैक कोरोना वैक्सीन ज्यादा सुरक्षित है और इसे रेफ्रिजिरेटर के तापमान में आसानी से स्टोर किया जा सकता है। यह विकासशील देशों के हिसाब से बनाई गई है और दाम कर रखे गए हैं। लेकिन पश्चिमी देशों ने इन खूबियों को नजरअंदाज कर दिया है।'' सिनोवैक वैक्सीन को विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण है। अमेरिका और पश्चिमी मीडिया के आउटलेट स्पष्ट रूप से चीनी वैक्सीनों के खिलाफ एक रुख रखते हैं। सौभाग्य से, चीनी टीकों के परीक्षणों में गंभीर दुर्घटनाओं के कोई भी मामले सामने नहीं आए हैं।

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