दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद जिले में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। पार्टी के इस फैसले से नाराज पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को दतिया में भारी बवाल देखने को मिला, जहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। इस विरोध प्रदर्शन ने उस समय उग्र रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच सीधी झड़प हो गई।
बीजेपी कार्यालय की छत पर चढ़े समर्थक और राजमार्ग पर जाम
विरोध की शुरुआत दतिया स्थित भाजपा जिला कार्यालय से हुई, जहां नरोत्तम मिश्रा के समर्थक बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। आक्रोशित कार्यकर्ता कार्यालय की छत पर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद, लगभग 3000 से अधिक प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर पहुंच गए और वहां चक्काजाम कर दिया। यह जाम करीब 12 घंटे तक जारी रहा, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। समर्थकों की मांग थी कि पार्टी अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और नरोत्तम मिश्रा को ही चुनाव मैदान में उतारे।
पुलिस पर पथराव और आंसू गैस के गोले
दतिया के जिलाधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 44 को पूरी तरह बाधित कर दिया था। जब पुलिस ने रास्ता खुलवाने का प्रयास किया, तो भीड़ की ओर से पथराव शुरू कर दिया गया। इस पथराव में 6 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर समझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वे बाजार बंद कराने और हिंसा पर उतारू हो गए और फिलहाल पुलिस ने राजमार्ग को खुलवा दिया है और कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया है।
पार्टी के भीतर इस्तीफों की झड़ी और उम्मीदवार का परिचय
आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी का विरोध केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा। इससे पहले शुक्रवार 10 जुलाई को भाजपा के जिला इकाई अध्यक्ष और कई स्थानीय पार्षदों सहित अनेक पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी का पुराना नाता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा है और वे लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पार्टी ने इस बार एक संगठनात्मक चेहरे पर दांव लगाया है, लेकिन नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता की अनदेखी उनके समर्थकों को रास नहीं आ रही है।
नरोत्तम मिश्रा का कद और उपचुनाव की पृष्ठभूमि
डॉ नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश भाजपा के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक माने जाते हैं। वे कई बार विधायक रह चुके हैं और प्रदेश सरकार में गृह तथा जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। साल 2020 के सियासी घटनाक्रम में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें दतिया सीट से हार का सामना करना पड़ा था। दतिया में उपचुनाव की स्थिति कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के कारण बनी है। राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में 3 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उनकी सदस्यता चली गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
मतदान और मतगणना की तारीखें
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। इसके बाद 3 अगस्त को मतों की गिनती की जाएगी। एक तरफ जहां भाजपा आंतरिक कलह से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने अभी तक अपने प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। माना जा रहा है कि कांग्रेस जल्द ही अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान करेगी। प्रशासन ने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है और उपद्रव करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
