दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान राजस्व संग्रह के मामले में एक बड़ी सफलता प्राप्त की है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इस साल राजस्व में 17 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। राजस्व में यह बढ़ोतरी दिल्ली के सरकारी खजाने के लिए एक सकारात्मक संकेत है और इसे शराब की बिक्री और कर संग्रह प्रणाली में किए गए प्रशासनिक सुधारों का परिणाम माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सप्लाई चेन के बेहतर प्रबंधन और आबकारी चोरी रोकने के लिए उठाए गए कड़े कदमों ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजस्व आंकड़ों का विस्तृत विवरण
आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, चालू जून तिमाही में सरकार ने लगभग 1038 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया है। यदि इसकी तुलना पिछले साल की इसी अवधि से की जाए, तो उस समय यह आंकड़ा 885 करोड़ रुपये था। इस प्रकार, एक साल के भीतर राजस्व में 17 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। इस भारी वृद्धि का सबसे मुख्य कारण दिल्ली की दुकानों में शराब के विभिन्न ब्रांडों की बेहतर उपलब्धता को माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस साल उपभोक्ताओं को उनकी पसंद के ब्रांड आसानी से मिल रहे हैं, जिससे बिक्री में तेजी आई है और सरकार की कमाई बढ़ी है।
भविष्य के लक्ष्य और बाजार की स्थिति
दिल्ली सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए भी राजस्व के ऊंचे लक्ष्य निर्धारित किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 7148 करोड़ रुपये के कुल राजस्व संग्रह के मुकाबले, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल आबकारी राजस्व का लक्ष्य 7200 करोड़ रुपये तय किया गया है। विभाग को पूरी उम्मीद है कि पंजीकृत ब्रांडों की संख्या में वृद्धि होने से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे। इससे दिल्ली को अपना वह बाजार हिस्सा वापस पाने में मदद मिलेगी जो पिछले कुछ वर्षों में नोएडा और गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों की ओर चला गया था। पहले प्रतिस्पर्धी कीमतों और अधिक विकल्पों के कारण लोग पड़ोसी राज्यों से खरीदारी करना पसंद करते थे, लेकिन अब दिल्ली में स्थिति सुधर रही है।
नीतिगत स्थिरता और प्रशासनिक सुधार
दिल्ली में वर्तमान में लागू आबकारी व्यवस्था दरअसल 2021 से पहले के ढांचे का ही विस्तार है। सितंबर 2022 में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा अनियमितताओं के आरोपों के बीच अपनी 2021-22 की नई आबकारी नीति को वापस लेने के बाद पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू किया गया था। तब से पुरानी नीति को ही समय-समय पर आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि पिछले साल नीति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ब्रांडों के पंजीकरण की गति धीमी हो गई थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह स्थिर हो गई है। इससे रिटेल मार्केट में उपलब्ध शराब की किस्मों का विस्तार करने के प्रयासों को फिर से गति मिली है।
रिटेल नेटवर्क और सरकारी निगमों की भूमिका
दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री का प्रबंधन पूरी तरह से सरकारी निगमों के हाथों में है। इसमें दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTTDC), दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (DSCSC) और दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) शामिल हैं। ये निगम सुनिश्चित करते हैं कि शराब की बिक्री पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से हो और वर्तमान में दिल्ली में 700 से अधिक शराब की दुकानों का एक विस्तृत नेटवर्क काम कर रहा है। इसके अलावा, शहर के 900 से अधिक होटलों, क्लबों और रेस्तरां के पास शराब परोसने का वैध लाइसेंस है। यह व्यापक ढांचा न केवल उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि सरकार के लिए राजस्व के अवसरों को भी अधिकतम करता है।
