दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अभियान के तहत तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले से 6 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन संदिग्धों के तार सीमा पार स्थित आतंकी संगठनों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे थे। इन सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच ट्रेन के जरिए दिल्ली लाया गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ये आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।
तिरुप्पुर के गारमेंट यूनिट्स से हुई गिरफ्तारी
पुलिस की विशेष टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर तिरुप्पुर के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक, इन संदिग्धों को तिरुप्पुर की विभिन्न गारमेंट यूनिट्स से पकड़ा गया है। गिरफ्तारियों का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि उथुकुली क्षेत्र से 02 आरोपियों को हिरासत में लिया गया, जबकि पल्लादम से 03 और तिरुमुरुगनपूंडी से 01 आरोपी को गिरफ्तार किया गया। ये सभी आरोपी इन औद्योगिक क्षेत्रों में सामान्य श्रमिकों के रूप में काम कर रहे थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के समन्वय से इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि
दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबत, उमर, मोहम्मद लितान, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्जल के रूप में हुई है। जांच अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले हैं और उन्होंने अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया था। ये आरोपी पिछले काफी समय से तमिलनाडु के औद्योगिक क्षेत्रों में छिपकर रह रहे थे। पुलिस अब इनके पिछले रिकॉर्ड और भारत में इनके अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है और इनके पास से बरामद दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि इनके नेटवर्क की पूरी गहराई का पता लगाया जा सके।
फर्जी आधार कार्ड और पहचान छिपाने का तरीका
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये सभी आरोपी फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, इन संदिग्धों ने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए भारतीय पहचान पत्रों के साथ छेड़छाड़ की थी। गारमेंट इंडस्ट्री में काम करने की आड़ में ये लोग न केवल अपना गुजारा कर रहे थे, बल्कि आतंकी नेटवर्क का विस्तार भी कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन्होंने स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड और अन्य सुविधाएं प्राप्त की थीं। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेशी नागरिकों का इस तरह बसना एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
डिजिटल साक्ष्य और सीमा पार से फंडिंग
पुलिस ने आरोपियों के पास से 8 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद किए हैं। फॉरेंसिक जांच में इन मोबाइल फोन के डेटा से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और अधिकारियों के अनुसार, ये संदिग्ध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान और बांग्लादेश स्थित अपने हैंडलर्स के संपर्क में थे। इनके फोन से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के समर्थन में पोस्ट किया गया कंटेंट भी मिला है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इन संदिग्धों को सीमा पार से हवाला या अन्य अवैध माध्यमों से फंडिंग मिल रही थी और बरामद सिम कार्ड्स का उपयोग विदेशी नंबरों पर बातचीत करने और आतंकी गतिविधियों के समन्वय के लिए किया जा रहा था।
रैकी और आतंकी नेटवर्क का विस्तार
पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि इन आरोपियों ने देश के कई महत्वपूर्ण शहरों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रैकी की थी। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय युवाओं को बरगलाने और उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश में भी जुटे थे। इनका मुख्य उद्देश्य एक स्लीपर सेल तैयार करना था जो समय आने पर आतंकी हमलों को अंजाम दे सके। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब इस बात की जांच कर रही है कि इनके निशाने पर कौन-कौन से शहर थे और क्या इनके पास हथियारों या विस्फोटकों की कोई खेप पहुंचने वाली थी। फिलहाल, सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर आगे की तफ्तीश जारी है।
