डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका: कोर्ट ने 10% टैरिफ को बताया गैरकानूनी, अधिकार उल्लंघन का आरोप

अमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% टैरिफ को गैरकानूनी और अमान्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने इसे कांग्रेस द्वारा दी गई शक्तियों का उल्लंघन माना है। फिलहाल यह राहत वॉशिंगटन राज्य और दो निजी कंपनियों को मिली है, जबकि अन्य आयातकों पर टैरिफ जारी रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ के मामले में एक बार फिर बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक बताया था और हालांकि, वर्तमान में कोर्ट ने केवल दो निजी आयातकों और वाशिंगटन राज्य के लिए ही इस टैरिफ पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

कोर्ट का फैसला और प्रभावित पक्ष

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क स्थित कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के तीन जजों के पैनल ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने छोटे व्यवसायों द्वारा दायर मुकदमे के बाद 10% टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित किया। जजों ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ट्रंप ने कानून के तहत कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति को दिए गए अधिकारों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने इन टैरिफ को “अमान्य” और “अनऑथराइज्ड” करार दिया है। फिलहाल, कोर्ट के इस फैसले से सीधे तौर पर वॉशिंगटन राज्य और दो निजी कंपनियों, स्पाइस कंपनी Burlap & Barrel और खिलौना कंपनी Basic Fun को टैरिफ वसूली से राहत मिली है।

टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि और समयसीमा

यह पूरा विवाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा फरवरी में लगाए गए अस्थायी 10% ग्लोबल टैरिफ से जुड़ा है। यह कदम तब उठाया गया था जब पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने लगभग हर देश पर लगाए गए बड़े डबल-डिजिट टैरिफ को पलट दिया था। फरवरी में लागू किए गए ये नए टैरिफ, 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत लगाए गए थे, जिनकी समयसीमा 24 जुलाई को समाप्त होने वाली है। इसी मामले को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने अन्य 24 आयातकों पर टैरिफ न लगाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। वर्तमान में केवल 3 आयातकों को ही इस टैरिफ से छूट प्रदान की गई है।

सुप्रीम कोर्ट का पिछला ऐतिहासिक फैसला

इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मनमाने ढंग से निर्धारित की गई टैरिफ दरों को गैरकानूनी घोषित किया था। सुप्रीम कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला 6-3 के बहुमत से आया था, जिसके बाद ही ट्रंप प्रशासन ने 10 प्रतिशत का नया टैरिफ प्लान पेश किया था। उस समय कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 1970 के दशक के एक आपातकालीन कानून का हवाला देकर 100 से अधिक देशों पर टैरिफ थोपा था। कोर्ट ने यह भी पाया कि ट्रंप ने टैरिफ की धमकी देकर कई देशों के साथ व्यापार सौदे किए, जबकि संबंधित कानून में ‘टैरिफ’ शब्द का उल्लेख तक नहीं है, जिसके आधार पर उसे असंवैधानिक बताया गया था।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

अदालत के इस फैसले ने राष्ट्रपति की व्यापारिक शक्तियों और कांग्रेस द्वारा निर्धारित सीमाओं के बीच के कानूनी संघर्ष को एक बार फिर उजागर कर दिया है। फिलहाल यह राहत सीमित दायरे में है, लेकिन इसने भविष्य की व्यापार नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।