अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच एक बड़ा कदम उठाते हुए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को रोकने का ऐलान किया है। इसे ईरान के सामने अमेरिकी सरेंडर के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, ईरान पर हमले की शुरुआत से लेकर अब तक राष्ट्रपति ट्रंप इस जंग में तीन बार यू-टर्न ले चुके हैं और सबसे पहले 28 फरवरी को ट्रंप ने यह दावा किया था कि अमेरिकी हमले से ईरान में तख्तापलट हो जाएगा। उस दौरान हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की हत्या की बात सामने आई थी, हालांकि अमेरिका अपने इस मकसद में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाया। इसके बाद 7 मार्च को ट्रंप ने घोषणा की थी कि सीजफायर को लेकर ईरान से कोई बातचीत नहीं की जाएगी, लेकिन वे अपने इस बयान पर भी टिक नहीं सके।
प्रोजेक्ट फ्रीडम और होर्मुज की नाकाबंदी
अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज नाकाबंदी को खुलवाने के उद्देश्य से 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत करने की घोषणा की थी। 3 अप्रैल को इस ऑपरेशन को आधिकारिक तौर पर शुरू किया गया, लेकिन महज 48 घंटे के भीतर ही ट्रंप ने इसे रोकने का फैसला सुना दिया। अमेरिकी मीडिया संस्थान एनबीसी (NBC) के मुताबिक, सऊदी अरब के भारी दबाव के कारण ट्रंप को प्रोजेक्ट फ्रीडम रोकना पड़ा और यह ऑपरेशन मुख्य रूप से होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अमेरिकी सेना की देखरेख में शुरू किया गया था। इस दौरान भी ईरानी जहाजों की नाकाबंदी जारी रखी गई थी।
सऊदी अरब का कड़ा रुख और बेस देने से इनकार
सऊदी अरब ने इस सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है। सऊदी ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी और इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। सऊदी अरब का स्पष्ट कहना था कि यदि इस जंग की शुरुआत होती है, तो इसका सीधा और सबसे बड़ा नुकसान खाड़ी देशों को उठाना होगा। सऊदी ने ईरान को संदेश दिया कि वे इस मामले में केवल समझौता चाहते हैं, युद्ध नहीं। इसी कूटनीतिक दबाव के कारण अमेरिका को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय हमले
अमेरिका के इस ऑपरेशन के खिलाफ ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने भी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इस तनाव के बीच ईरान ने यूएई (UAE) पर कई हमले किए और वह सऊदी अरब पर भी हमला करने की पूरी तैयारी में था। क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में देखते हुए और सऊदी के असहयोग के बाद, ट्रंप ने खुद सामने आकर प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकने की पुष्टि की। ट्रंप ने अब ईरान से बातचीत की संभावनाओं के कारण इस सैन्य प्रोजेक्ट को बंद करने की बात कही है।
सऊदी अरब के इस कड़े रुख ने अमेरिका को खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों को सीमित करने पर मजबूर कर दिया है। ट्रंप ने अब स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ही प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोका गया है।
