वैश्विक और घरेलू वित्तीय बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में एक बड़ा सुधार देखा जा रहा है, जिसमें न्यूयॉर्क से लेकर मुंबई तक सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस अचानक आई गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, जिसने दुनिया भर में स्थायी महंगाई की आशंकाओं को फिर से जगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 109 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास बनी हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और निवेशक सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों से हाथ खींच रहे हैं। निवेशकों को डर है कि ऊर्जा की बढ़ती लागत केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों पर सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर करेगी, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान और कीमतों में हलचल
अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थानीय सोने और चांदी की कीमतों के लिए प्राथमिक बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है, और न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार के वर्तमान रुझान एक व्यापक मंदी के संकेत दे रहे हैं और नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड फ्यूचर 4,327 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो लगभग 82 डॉलर प्रति औंस की पर्याप्त गिरावट दर्शाता है। साथ ही, सोने की हाजिर कीमत 4,296 डॉलर 38 सेंट प्रति औंस देखी गई, जिसमें 52 डॉलर 70 सेंट की गिरावट आई। यह गिरावट पिछले एक साल में सोने के शानदार प्रदर्शन के बावजूद आई है, जहां इसने लगभग 16 पॉइंट 6 प्रतिशत की वृद्धि बनाए रखी है। हाल के हफ्तों में सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया था, जिससे निवेशकों के लिए मुनाफावसूली का एक बड़ा अवसर पैदा हुआ, जो अब महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य के रास्तों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।
चांदी को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। न्यूयॉर्क वायदा बाजार में चांदी की कीमतें लगभग 3 प्रतिशत गिरकर 63 डॉलर 37 सेंट प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थीं। हाजिर चांदी बाजार ने भी इसी का अनुसरण किया, जहां कीमतें 2 पॉइंट 21 प्रतिशत गिरकर 63 डॉलर 0635 सेंट प्रति औंस पर पहुंच गईं। निरंतर औद्योगिक मांग और आपूर्ति की कमी की रिपोर्टों के बावजूद, चांदी अपनी ऊपर की गति को बनाए रखने में विफल रही है, जिसका मुख्य कारण ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के दबाव के जवाब में डॉलर की मजबूती को लेकर व्यापक व्यापक आर्थिक चिंताएं हैं।
घरेलू बाजार पर प्रभाव: एमसीएक्स सोना और चांदी क्रैश
वैश्विक बिकवाली का असर भारत के घरेलू कमोडिटी बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने की कीमतों में 2,300 रुपये की भारी गिरावट देखी गई। सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान सोना 1,50,896 रुपये प्रति दस ग्राम पर खुला, लेकिन जल्द ही गिरकर 1,50,471 रुपये पर आ गया, जो 2,313 रुपये या 1 पॉइंट 51 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यह पिछले हफ्ते के समापन मूल्य 1,52,784 रुपये के मुकाबले एक तेज गिरावट है। शाम 6 बजे तक कीमत 1,50,599 रुपये के आसपास थी, जो 2,185 रुपये नीचे थी। बाजार अब बारीकी से देख रहा है कि क्या आने वाले दिनों में सोना 1 लाख 50 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के मनोवैज्ञानिक समर्थन स्तर को तोड़ देगा।
एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में और भी नाटकीय गिरावट देखी गई है, जो 5,000 रुपये से अधिक टूट गई है। यह धातु 2,29,919 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले बंद से 2 पॉइंट 15 प्रतिशत या 5,055 रुपये की गिरावट है। दिन की शुरुआत में चांदी एमसीएक्स पर 2,31,507 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली थी, जो पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन के 2,34,974 रुपये के बंद भाव से काफी कम थी। शाम 6 बजकर 5 मिनट तक कीमत 2,30,671 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो 4,303 रुपये की गिरावट दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी वर्तमान में अपने उच्चतम स्तर से 40 प्रतिशत से अधिक नीचे कारोबार कर रही है, जबकि औद्योगिक मांग अभी भी बनी हुई है।
कच्चे तेल का कारक और भू-राजनीतिक तनाव
इस बाजार अस्थिरता का प्राथमिक उत्प्रेरक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, जो 109 डॉलर प्रति बैरल के पास चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह उछाल मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण हुआ, विशेष रूप से सऊदी अरब द्वारा ड्रोन हमलों के बाद अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद करने के बाद। इस व्यवधान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षों के साथ मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग से जुड़े जोखिमों को बढ़ा दिया है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई में सीधा योगदान देती हैं, जो बदले में प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
केंद्रीय बैंक की नीतियां और महंगाई के आंकड़े
बढ़ती महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व से अधिक सख्त रुख की उम्मीदों को मजबूत किया है और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार विश्लेषक अब आगामी बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर वृद्धि की 90 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने पर नीचे की ओर दबाव डालती हैं क्योंकि यह कोई ब्याज या लाभांश नहीं देता है, जिससे यह ब्याज देने वाले निवेशों की तुलना में कम आकर्षक हो जाता है। हाल के अमेरिकी आर्थिक आंकड़े इस चिंता का समर्थन करते हैं, जहां जुलाई में 0 पॉइंट 1 प्रतिशत की वृद्धि के बाद अगस्त में उपभोक्ता कीमतें 0 पॉइंट 4 प्रतिशत बढ़ीं। वार्षिक महंगाई दर 3 पॉइंट 4 प्रतिशत है, जबकि कोर सीपीआई, जिसमें भोजन और ऊर्जा शामिल नहीं है, अगस्त में 0 पॉइंट 3 प्रतिशत बढ़ी।
भारत में भी महंगाई का दबाव उतना ही स्पष्ट है। थोक महंगाई (WPI) लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि खुदरा महंगाई (CPI) 4 पॉइंट 82 प्रतिशत पर बनी हुई है। इन आंकड़ों ने भविष्य के ब्याज दर निर्णयों के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) पर महत्वपूर्ण दबाव डाल दिया है। इसके अलावा, ईरान और खाड़ी देशों के बीच एक निर्धारित बैठक के टलने से मध्य पूर्व में कूटनीतिक सफलता की उम्मीदें कम हो गई हैं, जिससे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और निरंतर महंगाई का जोखिम बना हुआ है। यदि वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक इन मुद्रास्फीति के दबावों से निपटने के लिए आक्रामक रूप से दरें बढ़ाना शुरू करते हैं, तो निकट भविष्य में सोने और चांदी दोनों में और बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।
