कमोडिटी बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे हालिया तेजी पर विराम लग गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में ₹3300 प्रति किलोग्राम की भारी कमी आई, जबकि सोना ₹500 प्रति 10 ग्राम तक नीचे गिर गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली के कारण कीमती धातुओं पर दबाव देखा जा रहा है।
पिछले कुछ सत्रों से लगातार बढ़त बना रहे सर्राफा बाजार में इस अचानक आई गिरावट ने कारोबारियों का ध्यान आकर्षित किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और निवेशकों की सतर्कता को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है। अधिकारियों और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, यह बदलाव वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में हो रहे बदलावों का परिणाम है।
चांदी की कीमतों में दर्ज की गई बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के भाव में तेज गिरावट देखी गई। चांदी की कीमतें लगभग 2% गिरकर ₹2,35,133 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं। एक ही कारोबारी सत्र में चांदी में ₹3,300 की यह कमी हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, ऊंचे भाव पर बिकवाली के दबाव ने कीमतों को नीचे धकेला है।
सोने के भाव में आई नरमी
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी नरमी का रुख रहा। MCX पर 24 कैरेट सोना ₹500 की गिरावट के साथ ₹1,51,272 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। हालांकि सोने में गिरावट चांदी के मुकाबले कम रही, लेकिन इसने बाजार में अनिश्चितता के माहौल को स्पष्ट कर दिया है। स्थानीय बाजारों में भी इस गिरावट का असर देखने को मिला है, जिससे खरीदारों के बीच हलचल बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का कीमतों पर असर
वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 83 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। वहीं, अंतरराष्ट्रीय सोना लगभग 4,715 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है और कीमतें गिरती हैं।
बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रमुख कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। इनमें प्रमुख रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर आगामी रुख, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक विकास की गति शामिल है। इसके अलावा, घरेलू बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित कर रहा है। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स फिलहाल बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।
