अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के कारण दिल्ली सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। दिल्ली में चांदी की कीमत में ₹5,000 प्रति किलोग्राम का उछाल आया, जबकि सोने की कीमतों में ₹2,300 प्रति 10 ग्राम की वृद्धि देखी गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक निवेशकों द्वारा डॉलर से निवेश निकालकर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख करने से कीमतों को मजबूती मिली है और इसके अतिरिक्त, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते और सीजफायर की खबरों ने भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाई है।
दिल्ली में सोने और चांदी की नई कीमतें
11 प्रतिशत या ₹5,000 बढ़कर ₹2,42,000 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पिछले कारोबारी सत्र में चांदी ₹2,37,000 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। 52 प्रतिशत या ₹2,300 का इजाफा हुआ, जिससे यह ₹1,53,800 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में सोने का भाव ₹1,51,500 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था। बाजार में यह उछाल हालिया गिरावट के बाद देखी गई 'वैल्यू बाइंग' के कारण भी माना जा रहा है।
डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल का प्रभाव
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में आई नरमी ने कीमती धातुओं की कीमतों को समर्थन दिया है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना और चांदी सस्ते हो जाते हैं, जिससे मांग बढ़ती है और इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से भी सर्राफा बाजार को मजबूती मिली है। व्यापारियों ने कम कीमतों पर खरीदारी (बार्गेन बाइंग) को प्राथमिकता दी, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों में सुधार देखने को मिला है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की स्थिति
वैश्विक स्तर पर भी सोने और चांदी की कीमतों में सकारात्मक रुख देखा गया। 37 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। 80 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में आई यह तेजी सीधे तौर पर घरेलू बाजार की कीमतों को प्रभावित कर रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और सीजफायर की संभावनाएं
बाजार के जानकारों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं और ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष-विराम की संभावनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के खुलने की खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों को नरम किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित समय सीमा से पहले ईरान संघर्ष में सीजफायर की उम्मीदों ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता को कम किया है, जिसका असर कीमती धातुओं की ट्रेडिंग पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
आगामी आर्थिक आंकड़ों का बाजार पर प्रभाव
आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इसमें एफओएमसी (FOMC) मिनट्स, कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका के रोजगार के आंकड़े भी सर्राफा कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति में पूर्ण स्थिरता नहीं आती, तब तक कीमती धातुओं की कीमतें इन मैक्रो डेटा और वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बनी रहेंगी।
