अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष को 37 दिन बीत चुके हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में अब तक 3,500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण वैश्विक तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए दी गई समयसीमा आज समाप्त हो रही है, जिसके बीच वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, चीन और सऊदी अरब जैसे देश इस तनाव को कम करने के लिए विभिन्न शांति प्रस्तावों पर काम कर रहे हैं।
पाकिस्तान का 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' प्रस्ताव
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने एक व्यापक शांति ढांचा तैयार किया है जिसे 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' का नाम दिया गया है। इस प्रस्ताव में तत्काल युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रावधान है। योजना के तहत, युद्धविराम के 15 से 20 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौते को अंतिम रूप दिया जाना है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस संबंध में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ निरंतर संपर्क में हैं। समझौते की अंतिम शर्तों पर चर्चा के लिए इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है, हालांकि ईरान की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।
अमेरिका का दो-चरणीय शांति प्रस्ताव
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और क्षेत्रीय मध्यस्थ एक 'टू-फेज डील' पर चर्चा कर रहे हैं। इस प्रस्ताव के पहले चरण में 45 दिनों के युद्धविराम की बात कही गई है। दूसरे चरण में युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी देनी होगी, जिसके बदले में अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और जमी हुई संपत्तियों को रिलीज करने पर विचार कर सकता है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का भी सुझाव दिया गया है।
चीन और क्षेत्रीय देशों की कूटनीतिक भूमिका
चीन इस संकट में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरा है। ईरानी तेल के सबसे बड़े खरीदार के रूप में चीन ने तेहरान पर युद्ध समाप्त करने के लिए आर्थिक दबाव का उपयोग किया है और पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, चीन, पाकिस्तान और अमेरिका मिलकर एक अस्थायी युद्धविराम के लिए साझा प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, मिस्र और तुर्की ने एक अलग शांति पहल शुरू की है, जिसमें अरब देशों की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल में होर्मुज को एक तटस्थ जलमार्ग घोषित करने और ईरान को भविष्य में हमलों से सुरक्षा की गारंटी देने जैसे बिंदु शामिल हैं।
ईरान की 10 सूत्रीय शर्तें और वर्तमान रुख
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव पर 10 बिंदुओं वाला एक विस्तृत जवाब भेजा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी अस्थायी युद्धविराम के बजाय अपनी शर्तों पर स्थायी शांति चाहता है। ईरान की प्रमुख शर्तों में पूरे क्षेत्र में सैन्य हमलों की पूर्ण समाप्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही की बहाली, युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में सहायता और सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। ईरान का रुख है कि जब तक अमेरिका और इजराइल के हमले बंद नहीं होते, वह किसी भी सीधी वार्ता में शामिल नहीं होगा।
सऊदी अरब का रुख और आर्थिक दबाव
सऊदी अरब सार्वजनिक रूप से शांति बहाली का समर्थन कर रहा है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि रियाद ने शुरुआत में कड़ा रुख अपनाया था, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से सऊदी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव ने उसे भी सीजफायर के पक्ष में आने पर मजबूर किया है। वर्तमान में सबसे प्रभावी प्रस्ताव 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' माना जा रहा है जिसे चीन और अमेरिका का भी समर्थन प्राप्त है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह से ईरान की अंतिम सहमति पर निर्भर करती है।
