US-Iran Ceasefire: अमेरिका-ईरान जंग रुकी, निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी को लगा बड़ा झटका

अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से सीजफायर लागू हो गया है, जिससे वैश्विक तनाव कम हुआ है। हालांकि, अमेरिका में रह रहे ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के लिए यह एक राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जो ईरान में सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व की उम्मीद लगाए बैठे थे।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष पर 28 फरवरी से विराम लग गया है। दोनों देशों के बीच हुए इस युद्धविराम समझौते ने वैश्विक स्तर पर राहत की लहर पैदा की है। इस समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से सुचारू रूप से शुरू होने की उम्मीद है और हालांकि, इस शांति समझौते ने अमेरिका में निर्वासन का जीवन बिता रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की राजनीतिक योजनाओं पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

रजा पहलवी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं और सीजफायर का असर

ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के दौरान ईरान में सत्ता परिवर्तन की उम्मीदें जताई थीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वह ईरान में लोकतंत्र की स्थापना के लिए नेतृत्व करने को तैयार हैं और पहलवी का लक्ष्य ईरान को अमेरिका का एक रणनीतिक साझेदार बनाना था। सीजफायर की घोषणा के बाद उनकी उन योजनाओं को झटका लगा है, जिनमें वह मौजूदा शासन के पतन के बाद एक नई भूमिका देख रहे थे।

ईरानी सुरक्षा बलों से की गई भावुक अपील

युद्धविराम से ठीक पहले रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर ईरानी सुरक्षा बलों के नाम एक संदेश जारी किया था और इस संदेश में उन्होंने सुरक्षा बलों के भीतर देशभक्ति की भावना जगाने का प्रयास किया था। उन्होंने कमांडरों को संबोधित करते हुए उन्हें 'देशभक्त और महान पूर्वजों का वारिस' बताया था। पहलवी ने ईरान के लोगों से वादा किया था कि वह देश को फिर से महान बनाएंगे, जैसा कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का नारा रहा है।

1979 की क्रांति और निर्वासन का लंबा सफर

रजा पहलवी का जन्म 1960 में तेहरान में हुआ था। वह महज 7 साल की उम्र में तब चर्चा में आए जब उनके पिता के राज्याभिषेक के दौरान उन्हें औपचारिक रूप से युवराज घोषित किया गया। 17 साल की उम्र में वह ईरान के सबसे युवा पायलट बने और जेट फाइटर की ट्रेनिंग के लिए अमेरिका चले गए। 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान ईरान में राजशाही खत्म हो गई और उनके पिता को सत्ता से बेदखल कर दिया गया। तब से पहलवी अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ अमेरिका में ही रह रहे हैं।

लोकतंत्र और भविष्य की शासन व्यवस्था पर पहलवी के विचार

पहलवी ने हमेशा धर्म को राजनीति से अलग रखने और ईरान में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने की वकालत की है। हालांकि कुछ वर्गों में यह चिंता रही है कि वह अपने पिता के शासन की तरह तानाशाही वापस ला सकते हैं, लेकिन पहलवी ने स्पष्ट किया है कि वह संवैधानिक राजतंत्र की जबरन बहाली नहीं चाहते। उन्होंने कहा है कि ईरान की जनता जो भी फैसला करेगी, एक संवैधानिक सभा उसी के आधार पर भविष्य का मसौदा तैयार करेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक व्यापार पर प्रभाव

सीजफायर समझौते का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने की संभावना है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, वहां अब जहाजों की आवाजाही बिना किसी सैन्य खतरे के हो सकेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कदम का स्वागत किया है क्योंकि इससे कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।