मध्य पूर्व एशिया में पिछले 38 दिनों से जारी भीषण संघर्ष पर अचानक विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात ईरान पर संभावित हमलों की अपनी धमकियों से पीछे हटते हुए संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने यह फैसला तेहरान को दी गई उस डेडलाइन के खत्म होने से ठीक पहले लिया, जिसमें उन्होंने ईरान को झुकने या बड़े युद्ध का सामना करने की चेतावनी दी थी। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चर्चा तेज थी, लेकिन इसी बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
ट्रंप की डेडलाइन और अचानक संघर्ष विराम का ऐलान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ हुई बातचीत के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं और गौरतलब है कि ट्रंप लगातार ईरान को कड़ी चेतावनी और समय सीमा दे रहे थे। मंगलवार को डेडलाइन खत्म होने में 2 घंटे से भी कम समय बचा था, तभी अचानक जंग को कम करने और कूटनीति को मौका देने का फैसला लिया गया। आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह निर्णय क्षेत्र में स्थिरता लाने के उद्देश्य से लिया गया है, हालांकि ट्रंप के इस तरह बार-बार डेडलाइन से पीछे हटने को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
शहबाज शरीफ का 'ड्राफ्ट' पोस्ट और सोशल मीडिया विवाद
46 बजे एक विस्तृत पोस्ट साझा किया। इस पोस्ट की शुरुआत में 'Draft – Pakistan’s PM Message on X' लिखा हुआ था। इस तकनीकी चूक ने तुरंत नेटिजन्स का ध्यान खींचा और यह सवाल उठने लगे कि क्या यह संदेश स्वयं प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा तैयार किया गया था या इसे कहीं बाहर से भेजा गया था। विशेषज्ञों का तर्क है कि आमतौर पर किसी देश के प्रधानमंत्री की टीम अपने ही नेता के संदेश के आगे देश का नाम 'ड्राफ्ट' के रूप में नहीं लिखती है। 47 बजे पोस्ट को एडिट कर दिया, लेकिन तब तक इसके स्क्रीनशॉट वायरल हो चुके थे।
ईरान से अपील और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा
अपने पोस्ट में शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति ट्रंप से डेडलाइन को 2 हफ्ते के लिए आगे बढ़ाने का विनम्र अनुरोध किया था। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से भी एक महत्वपूर्ण अपील की। शरीफ ने लिखा कि पाकिस्तान अपने ईरानी भाइयों से अनुरोध करता है कि वे सद्भावना के तौर पर अगले 2 हफ्ते के लिए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को खोल दें। उन्होंने युद्ध में शामिल सभी पक्षों से कूटनीति को अवसर देने और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए संघर्ष विराम का पालन करने का आग्रह किया। इस संदेश का उद्देश्य तनाव को कम करना और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुचारू बनाना बताया गया है।
मध्यस्थता की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में विरोधाभास
सीजफायर के पीछे मुख्य सूत्रधार कौन है, इसे लेकर वैश्विक मीडिया में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर लाने और संघर्ष विराम की दिशा में प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में चीन के कूटनीतिक प्रयासों को प्रमुखता दी है। दूसरी ओर, अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन का दावा है कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका सबसे अहम रही है। ट्रंप द्वारा सीधे तौर पर पाकिस्तानी नेतृत्व का नाम लिए जाने से इस दावे को बल मिला है, लेकिन चीन के हस्तक्षेप की खबरों ने मामले को त्रिकोणीय बना दिया है।
क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक प्रयासों का भविष्य
फिलहाल 2 हफ्ते के लिए संघर्ष विराम और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता साफ होता दिख रहा है। पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, देश पिछले कई दिनों से मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा हुआ था। शरीफ के पोस्ट में कहा गया है कि शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक कोशिशें मजबूती से आगे बढ़ रही हैं और जल्द ही ठोस नतीजे निकलने की संभावना है। हालांकि, 'ड्राफ्ट' पोस्ट विवाद ने पाकिस्तान सरकार के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति पैदा कर दी है, जिससे यह सवाल बना हुआ है कि क्या इस कूटनीतिक पटकथा के पीछे कोई और बड़ी शक्ति काम कर रही थी।
Diplomatic efforts for peaceful settlement of the ongoing war in the Middle East are progressing steadily, strongly and powerfully with the potential to lead to substantive results in near future. To allow diplomacy to run its course, I earnestly request President Trump to extend…
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) April 7, 2026
